LPG Connection: आज के समय में शहर से लेकर गांव तक हर घर में रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है कई बार ऐसा होता है कि गैस सिलेंडर के डीलर डिलीवरी करने में बहुत ज्यादा देरी कर देते हैं और अपनी मनमानी करते है तो ऐसे समय में एलपीजी कनेक्शन होल्डर क्या कर सकते हैं।

चलिए आपको बताते हैं। अब इन दिक्कतों का हल मिलने वाला है। जल्द ही एलपीजी उपभोक्ताओं को मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह ही अपने कनेक्शन को दूसरी कंपनी में पोर्ट करने का विकल्प मिल सकता है।
क्या है नया प्रस्ताव?
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने हाल ही में 'एलपीजी इंटर-ऑपरेबिलिटी' का प्रस्ताव रखा है। इसका सीधा मतलब है कि उपभोक्ता बिना नया कनेक्शन लिए अपने मौजूदा एलपीजी कनेक्शन को दूसरी कंपनी में शिफ्ट कर पाएंगे। अभी तक किसी कंपनी के सिलिंडर को केवल उसी कंपनी से रिफिल कराया जा सकता था, लेकिन नए नियम आने के बाद यह बाध्यता खत्म हो जाएगी।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
PNGRB का कहना है कि कई बार स्थानीय स्तर पर डीलरों को संचालन में परेशानी होती है, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ता है। सिलिंडर देर से मिलना या सर्विस में गड़बड़ी उपभोक्ताओं को खटकती है। चूंकि सभी कंपनियों की कीमतें लगभग समान होती हैं, इसलिए ग्राहकों को यह आजादी मिलनी चाहिए कि वे किस कंपनी या डीलर से सर्विस लेना चाहते हैं। इससे उन्हें समय पर सिलिंडर मिलेगा और सर्विसों की क्वालिटी भी सुधरेगी।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
यह विचार नया नहीं है। साल 2013 में तत्कालीन सरकार ने कुछ जिलों में एलपीजी पोर्टेबिलिटी स्कीम का ट्रायल किया था। इसके बाद 2014 में इसे पूरे देश में लागू किया गया। हालांकि उस समय केवल डीलर बदलने का विकल्प दिया गया था, कंपनी बदलने की सुविधा नहीं थी। कानूनी प्रावधानों के कारण एक कंपनी का सिलिंडर दूसरी कंपनी से रिफिल नहीं हो सकता था। इस वजह से उपभोक्ताओं को पूरी आजादी नहीं मिल पाई।
अब क्या होगा अलग?
इस बार का प्रस्ताव ग्राहकों को ज्यादा शक्ति देगा। अब वे सीधे कंपनी बदल पाएंगे। PNGRB ने इसके लिए उपभोक्ताओं, डीलरों और सामाजिक संगठनों से सुझाव मांगे हैं। सभी सुझावों के आधार पर नए दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे और फिर पूरे देश में लागू करने की तारीख तय होगी।
उपभोक्ताओं को कैसे होगा फायदा?
ग्राहकों को अब एक ही डीलर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
सिलिंडर की सप्लाई समय पर और बिना रुकावट मिलेगी।
कंपनियों के बीच कॉम्प्टीशन बढ़ेगा, जिससे सर्विस बेहतर होगी।
उपभोक्ता अपनी सुविधा और अनुभव के आधार पर कंपनी चुन सकेंगे।
अगर यह प्रस्ताव नियम बनकर लागू हो जाता है, तो यह गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा। यह न केवल ग्राहकों को आजादी देगा बल्कि कंपनियों पर भी सर्विस सुधारने का दबाव डालेगा। उम्मीद की जा रही है कि इससे लाखों परिवारों को रसोई गैस की आपूर्ति में बड़ी आसानी मिलेगी।
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