इनकम टैक्स : फटाफट जमा करें ये डॉक्यूमेंट्स, कम पड़ेगा टैक्स का बोझ

नयी दिल्ली। आपको इनकम टैक्स ज्यादा न भरने पड़े इसके लिए सही जानकारी होना जरूरी है। चाहे आप कारोबारी हैं या सैलेरी पाने वाले कर्मचारी इनकम टैक्स भरने को लेकर गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। वरना आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप जॉब करते हैं और आपकी एक साल की सैलेरी टैक्स छूट लिमिट से ज्यादा है तो ध्यान रखें कि नये साल में जनवरी से ही आपके वेतन में से अधिक टीडीएस काटना शुरू कर देती हैं। इसलिए आम तौर पर दिसंबर या जनवरी से ही कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को निवेश से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कहती हैं। इसके लिए कोई डेडलाइन यानी समय सीमा भी तय कर दी जाती है। इसके पीछे एक खास उद्देश्य होता है और वे ये कि इसके जरिये जितनी राशि आप निवेश के लिए दिखाते हैं उतनी राशि को आपकी सैलरी से कटने वाले टीडीएस में एडजस्ट किया जाता है।

निवेश पर मिलती है टैक्स से छूट

निवेश पर मिलती है टैक्स से छूट

ध्यान दें कि इनकम टैक्स कानून के तहत निवेश पर एक लिमिट तक आप हर साल टैक्स में छूट ले सकते हैं। आपने जहां निवेश किया है उसके लिए आपको प्रूफ डॉक्यूमेंट्स जमा करने होते हैं। जैसे यूलिप, लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड, पीपीएफ, होम लोन, एजुकेशन लोन, ट्यूशन फीस आदि टैक्स छूट के दायरे में आते हैं। इनकम टैक्स के सेक्शन 80 सी के तहत आपको टैक्स बेनेफिट मिलता है, मगर इसके लिए आपको कागजात जमा करने होते हैं।

ये कागजात करें जमा

ये कागजात करें जमा

टैक्स बेनफिट लेने के लिए आपको कंपनी के पास एलआईसी प्रीमियम की पेमेंट की रसीद, पीपीएफ में निवेश से जुड़े प्रूफ, होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट यानी मूल राशि पर रिपेमेंट की रिसीट, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में निवेश का प्रूफ, बच्चों की ट्यूशन फीस (दो बच्चे अधिकतम), 5 साल से ज्यादा की एफडी का प्रूफ, सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश का प्रूफ और यूलिप प्लान के प्रीमियम का प्रूफ ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में निवेश का प्रूफ देना होगा।

अब भी है बचत का मौका

अब भी है बचत का मौका

वैसे आपको बता दें कि अगर आपने अभी तक के Declaration के अनुसार निवेश नहीं किया है तो आप फटाफट निवेश करके उसके प्रूफ जमा करवा कर अधिक टैक्स से बच सकते हैं। यदि आप ज्यादा टैक्स का भुगतान नहीं करना चाहते तो फौरन निवेश करें। यदि ऐसा न हो तो आपकी हाथ में आने वाली सैलेरी घट सकती है। इससे आप पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। एक बार टैक्स कटने इनकम टैक्स रिटर्न भरने के बाद ही आपको रिफंड मिलेगा। इस प्रोसेस में कई महीने लग सकते हैं।

यह भी पढ़ें - इनकम टैक्स भरने वालों के लिए 2020 में जरूरी तारीखें, जानिये यहाँ

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