Namo Cities: नेशनल कैपिटल रीजन रीजनल प्लान 2041 के तहत चार नए ग्रीनफील्ड शहरों, जिन्हें 'नमो सिटीज' या 'नमो नोड्स' कहा जाएगा, का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्रस्ताव NCR प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बोर्ड बैठक के बाद घोषित किया गया था। यह बोर्ड 'नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड एक्ट, 1985' के तहत काम करता है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) एक प्लानिंग रीजन है जिसमें दिल्ली और हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के आस-पास के जिले शामिल हैं। साथ ही, पहले की प्लानिंग व्यवस्थाओं में पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्से भी इसमें शामिल थे। NCR प्लानिंग बोर्ड पूरे क्षेत्र में जमीन के इस्तेमाल, ट्रांसपोर्ट, शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के तालमेल के लिए रीजनल प्लान तैयार करता है।

NCR को नए शहरों की जरूरत क्यों है?
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब NCR में तेजी से शहरीकरण हो रहा है। अनुमान है कि 2041 तक इस इलाके की आबादी लगभग दोगुनी हो जाएगी, जिससे मौजूदा शहरों के लिए भविष्य की बढ़त को संभालना मुश्किल होता जाएगा। दिल्ली में जमीन की कमी है और नोएडा व गुरुग्राम जैसे शहर ज्यादा घने और महंगे होते जा रहे हैं, इसलिए प्लानर्स का मानना है कि आगे बढ़ने का सही तरीका विकेंद्रीकृत विकास (decentralised development) है। इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए, केंद्र सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये का परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव पैकेज प्रस्तावित किया है। इसमें 1,000 करोड़ रुपये की ग्रांट शामिल है, जबकि बाकी मदद लोन और गारंटी के जरिए मिलेगी।
प्रस्तावित नमो शहरों की खासियतें
NCR में शामिल चार राज्यों - दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान - में से हर एक में एक नमो शहर बनाने की योजना है। इन शहरों को 'नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम' लाइनों पर मौजूद और प्रस्तावित खास स्टेशनों के पास 'मिक्स्ड-यूज़ ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' के तौर पर विकसित किया जाएगा। 'ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट' शहरी प्लानिंग का एक मॉडल है जिसमें घरों, ऑफिस और पब्लिक सर्विस को मास ट्रांजिट स्टेशनों के पास बनाया जाता है। 'ग्रीनफील्ड शहर' ऐसी नियोजित शहरी बस्तियां होती हैं जिन्हें किसी मौजूदा शहर के मुख्य हिस्से को फिर से विकसित करने के बजाय, बिना विकसित ज़मीन पर बसाया जाता है।
रीजनल प्लान 2041 और आबादी का अनुमान
NCR रीजनल प्लान 2041, साल 2041 तक इस इलाके के लिए एक लॉन्ग-टर्म प्लानिंग डॉक्यूमेंट है। इस प्लान में शहरी विस्तार, ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, पर्यावरण मैनेजमेंट और संतुलित क्षेत्रीय विकास शामिल हैं। अनुमान है कि 2041 तक NCR की आबादी लगभग 7.5 करोड़ से बढ़कर 7.86 करोड़ और फिर 14.73 करोड़ से 15 करोड़ के बीच हो जाएगी। NCR प्लानिंग बोर्ड ने यह भी तय किया है कि NCR का भौगोलिक दायरा वैसा ही रहेगा।
जमीन की कीमतों पर क्या असर डाल सकता है?
RPS ग्रुप के डायरेक्टर अमन गुप्ता का कहना है कि 'नमो सिटीज' का आना NCR में रियल एस्टेट के माहौल को बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि इससे आम शहरी केंद्रों के बाहर 'ग्रोथ पोल' (विकास के केंद्र) बनेंगे। आम तौर पर, इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित प्रोजेक्ट्स से ज़मीन की कीमत में भारी बढ़ोतरी होती है, खासकर उन इलाकों में जहां बेहतर कनेक्टिविटी और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना होती है। बेहतर पहुंच के कारण, जो इलाके पहले आर्थिक केंद्रों से दूर या बाहरी इलाकों में थे, वे अब रहने और कमर्शियल कामों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकते हैं।


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