बाजारों में वैश्विक मंदी की बढ़ने की संभावना नजर आ रही है। फिलहाल इसकी इकलौती वजह कोरोनोवायरस बनी हुई है।
नई दिल्ली: बाजारों में वैश्विक मंदी की बढ़ने की संभावना नजर आ रही है। फिलहाल इसकी इकलौती वजह कोरोनोवायरस बनी हुई है। या यूं कहें कि कोरोना के कहर के कारण वैश्विक बाजार में पीली धातु के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ गया है। ऐसे में सोने में निवेश एक बार फिर भू-राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक उथल-पुथल के समय में एक सुरक्षित विकल्प हो सकती है। मौजूदा समय में सोने की वैश्विक कीमत 7 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि घरेलू बाजारों में सोने के स्तर में रु 43000 प्रति 10 ग्राम है। भारत में मिली सोने की खान ये भी पढ़ें
इन वजहों से मिल रहे अच्छे रिटर्न
इस साल की जारी कैलेंडर वर्ष के दो महीनों के अंदर ही सोने ने 12% का रिटर्न दिया। जबकि पिछले वर्ष के दौरान, इसमें 20-25% रिटर्न देखने को मिली थी।
1. कोरोनावायरस संक्रमण
2. अमेरिका-चीन के बीच का सौदा
3. वैश्विक आर्थिक मंदी
4. अधिकांश केंद्रीय बैंकों द्वारा सरल मौद्रिक नीति
5. केंद्रीय बैंकों द्वारा दुनिया भर में सोने की होर्डिंग्स की अधिकता
6. ब्रेक्सिट सौदा
जानें कैसे करें सोने की शुद्धता की पहचान
सोने की शुद्धता को मापने के लिए आजकल सर्राफा बाजार में कैरेटोमीटर उपलब्ध है। कुछ ही मिनटों में यह बता देता है कि आपको सोना कितने कैरेट का है। हालांकि, इसके लिए आपको कुछ पैसों का भुगतान करना होता है। आमतौर पर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 फीसद सोना होता है।
हॉलमार्किंग पर विषेश तौर पर दें ध्यान
हॉलमार्क पर पांच अंक होते हैं। सभी कैरेट का हॉलमार्क अलग होता है। ये अंक ही सोने की शुद्धता तय करते हैं। उदाहरण के तौर पर 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है। इससे शुद्धता में कोई शक नहीं रहता। हॉलमार्किंग योजना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम के तहत संचालित एवं नियमित होती है। हॉलमार्किंग से सोना-चांदी की शुद्धता प्रमाणित होती है। हालांकि, कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया के ही हॉलमार्क लगा देते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं? असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान बना होता है।
इस तरह तय होती है गोल्ड की कीमत
बता दें कि आभूषण में अंकित नंबर को देखकर आसानी से समझ सकते हैं कि आपका आभूषण कितने कैरेट सोने का बना हुआ है। इसी के हिसाब से आपके आभूषण की कीमत भी तय होती है। उदाहरण के लिए अगर 24 कैरेट सोने का दाम 40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम है तो बाजार में इसकी बनी ज्वैलरी की कीमत मेकिंग चार्ज को हटाकर (40000/24)X22=36,666.66 रुपये होगी। ऐसे में कई बार ऐसा होता है जब ग्राहक की लापरवाही का फायदा उठाकर ज्वेलर आपको 22 कैरेट सोना 24 कैरेट के दाम पर बेच देता है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।
डिजिटल गोल्ड काफी सरल तरीका सोना खरीदने का
सोना खरीदने के लिए घर से बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं है। सोने के सिक्के और बार ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। पेटीएम, फोनपे, गूगल पे, मोबिक्विक जैसे मोबाइल वॉलेट पर 'डिजिटल गोल्ड' आसानी से मिल रहा है। जानकारी दें कि यह डिजिटल गोल्ड 99.9 फीसद शुद्ध होता है। गूगल पे, पेटीएम जैसे मोबाइल वॉलेट ने गोल्ड बेचने के लिए MMTC-PAMP से साझेदारी की हुई है। पेटीएम पर आप एक रुपये का गोल्ड भी खरीद सकते हैं। इतना ही नहीं आप चाहें तो मोबाइल वॉलेट से खरीदे गए सोने को बेच दें या अपने घर पर मंगवा लें।
कई कंपनियां चला रही हैं ऐसी स्कीम्स
गोल्ड ईटीएफ की सुविधा कई म्युचुअल फंड कंपनियां देती हैं। इन गोल्ड ईटीएफ में निवेश के कई विकल्प मिलते हैं, जिसमें एक बार में या थोड़ा-थोड़ा करके गोल्ड खरीदने की छूट रहती है। निवेशक चाहे तो सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) माध्यम हर माह निवेश करके भी गोल्ड खरीद सकते हैं।
जानिए कैसे काम करती है स्कीम
गोल्ड ईटीएफ में निवेशक जितना भी पैसा लगाता है, उतने रुपये का गोल्ड उसके डीमैट अकाउंट में जमा कर दिया जाता है। इसके अलावा यह गोल्ड 24 कैरेट का होता है, इसमें मिलावट की आशंका नहीं होती है। अगर किसी ने 5 हजार रुपये का गोल्ड खरीदा है, तो उसे उस दिन के भाव के हिसाब से जितना भी गोल्ड 5 हजार रुपये में आएगा, उसे यूनिट के रूप में एलाट कर दिया जाएगा। इन्वेस्टर्स जैसे-जैसे गोल्ड में निवेश बढ़ाते जाते हैं, वैसे-वैसे उनकी गोल्ड की यूनिट बढ़ती जाती है।
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेट फंड
बता दें कि गोल्ड ईटीएफ म्युचुअल फंडों का एक प्रकार है जिसकी ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंजों पर की जाती है। परंतु ध्यान रहे कि इसे खरीदने के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट का होना जरूरी है। वहीं लिक्विडिटी के लिहाज से गोल्ड ईटीएफ सबसे अच्छा है। इसे आप जब चाहें स्टॉक एक्सचेंज पर बेच सकते हैं। ईटीएफ के मूल्य में उतार-चढ़ाव सोने की कीमतों पर निर्भर होता है। गोल्ड ईटीएफ में एकमुश्त या एसआईपी (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए नियमित अंतराल पर पैसों का निवेश कर सकते हैं।
जल्द हो सकता है 45000 रुपये का दस ग्राम
उधर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोना पिछले सप्ताह 1,651 डॉलर प्रति औंस तक उछला और कोरोना के प्रकोप के कारण निवेश के सुरक्षित साधन के तौर पर पीली धातु के प्रति निवेशकों का आकर्षण देखते हुए माना जा रहा है कि सोना आने वाले दिनों में 1,700 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ सकता है। ऐसे में अगर भारतीय सर्राफा बाजार में भी सोना 45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार कर जाए तो इसमें कोई अचरच नहीं होगा। कमोडिटी बाजार विश्लेषक भी सोने में अल्पावधि में 1,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी की उम्मीद कर रहे हैं।
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