ज्यादातर भारतीयों को लगता है कि अगर सैलरी ज्यादा है, तो भारी-भरकम टैक्स देना ही होगा। लेकिन सच तो यह है कि भारतीय टैक्स कानून आपको 'जीरो टैक्स' तक पहुंचने का कानूनी मौका देते हैं। सही छूट (Exemptions) के जरिए आप अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं। बस इसके लिए आपको वित्त वर्ष खत्म होने से पहले स्मार्ट प्लानिंग करनी होगी, ताकि आप ज्यादा से ज्यादा डिडक्शन का फायदा उठा सकें।
टैक्स बचाने की शुरुआत होती है 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) से। नौकरीपेशा लोगों को इसके लिए कोई निवेश प्रूफ देने की जरूरत नहीं होती, यह फायदा उन्हें अपने आप मिलता है। इसके बाद आता है सेक्शन 80C, जो 1.5 लाख रुपये तक की बड़ी छूट देता है। इसमें PPF और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे विकल्प शामिल हैं, जो न सिर्फ वेल्थ क्रिएट करते हैं बल्कि मिडिल क्लास के बीच टैक्स बचाने का सबसे पॉपुलर तरीका भी हैं।

टैक्स-फ्री इनकम और डिडक्शन का ऐसे उठाएं पूरा फायदा
सेहत के साथ-साथ सेक्शन 80D आपकी जेब को भी राहत देता है। इसमें आप अपने लिए 25,000 रुपये और माता-पिता के लिए 50,000 रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं। इतना ही नहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश कर आप 50,000 रुपये की एक्स्ट्रा छूट पा सकते हैं। साथ ही, 5,000 रुपये तक का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप भी टैक्स बचाने में मददगार है। इन सबको मिलाकर आप अपनी टैक्सेबल इनकम पर एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर सकते हैं।
होम लोन और HRA के जरिए करें स्मार्ट टैक्स प्लानिंग
अगर आपने घर खरीदा है, तो सेक्शन 24(B) के तहत होम लोन के ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक की बड़ी छूट मिलती है। वहीं, किराए के मकान में रहने वालों के लिए HRA (House Rent Allowance) टैक्स बचाने का बेहतरीन जरिया है। इन टूल्स का सही इस्तेमाल कर आप अपनी टैक्सेबल इनकम को 5 लाख रुपये की रिबेट लिमिट से नीचे ला सकते हैं, जिससे आपकी टैक्स देनदारी प्रभावी रूप से जीरो हो सकती है।
| सेक्शन | लिमिट (INR) | फायदे का प्रकार |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | 50,000 | फिक्स्ड सैलरी बेनिफिट |
| 80C निवेश | 1,50,000 | PPF, ELSS, इंश्योरेंस |
| 80D हेल्थ | 75,000 तक | मेडिकल इंश्योरेंस |
| सेक्शन 24(B) | 2,00,000 | होम लोन ब्याज |
टैक्स बचाना इस बात पर निर्भर करता है कि आप सही समय पर सही क्लेम करते हैं या नहीं। स्मार्ट इन्वेस्टर्स सेक्शन 80TTA का भी फायदा उठाते हैं, जिसमें सेविंग अकाउंट से मिलने वाले 10,000 रुपये तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता। बस ध्यान रहे कि आपके पास सभी जरूरी दस्तावेज तैयार हों ताकि ऑडिट के समय कोई परेशानी न हो। सही स्ट्रक्चरिंग के जरिए आप कानूनी रूप से अपनी मेहनत की कमाई का ज्यादा हिस्सा अपने पास रख सकते हैं।


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