ITR File 2025: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख इस साल 15 सितंबर तय की गई है। जैसे-जैसे डेडलाइन करीब आ रही है, वैसे-वैसे निवेशकों के लिए होसियार रहना जरूरी हो गया है। खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके पास डीमैट खाता है। अगर आपके पास यह खाता है और आपने अभी तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अब देर करना आपके लिए महंगा साबित हो सकता है।

डीमैट खाता क्या है और क्यों जरूरी है?
डीमैट खाता आपके निवेश को सुरक्षित रखने का आधुनिक तरीका है। इसमें शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसी सिक्योरिटीज इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी जाती हैं। इस खाते के जरिए खरीद-बिक्री करना आसान होता है और निवेश की सारी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध रहती है। पहले जहां निवेशकों को कागजी प्रमाणपत्र रखना पड़ता था, अब डीमैट खाता ही सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प बन चुका है।
टैक्स सीधे खाते पर नहीं, कमाई पर लगता है
डीमैट खाते में रखे गए शेयर या फंड पर सीधे तौर पर कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन जब आप इनसे कमाई करते हैं, तभी टैक्स देना जरूरी हो जाता है। यह कमाई अलग-अलग रूप में हो सकती है।
शेयर बेचने से हुआ मुनाफा
कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड
बॉन्ड या डेट सिक्योरिटीज से ब्याज इनकम
आयकर अधिनियम, 1961 के तहत इन सभी आय पर टैक्स देना अनिवार्य है।
आयकर विभाग को कैसे मिलती है जानकारी?
जब आप डीमैट खाता खोलते हैं तो उसमें आपका PAN और आधार लिंक किया जाता है। इसी आधार पर आपके सभी लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंचती है। यह डिटेल्स आपके फॉर्म 26AS और AIS (Annual Information Statement) में भी दर्ज रहती हैं। यानी अगर आप अपनी आय को छुपाने की कोशिश करते हैं, तो विभाग आसानी से इसका पता लगा सकता है।
शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन
शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर आपने शेयर या म्यूचुअल फंड को खरीदने के 12 महीने के भीतर बेच दिया और मुनाफा कमाया, तो उस पर 15% टैक्स लगेगा।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर निवेश एक साल से ज्यादा समय तक रखा गया है और उस पर मुनाफा हुआ है, तो 1 लाख रुपए तक की कमाई टैक्स-फ्री है। लेकिन 1 लाख रुपए से ज्यादा फायदे पर 10% टैक्स देना होगा।
डिविडेंड और ब्याज इनकम
कंपनियां अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देती हैं। यह आय आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है। कई बार कंपनियां 5,000 रुपए से ज्यादा डिविडेंड पर 10% TDS काट लेती हैं (अगर PAN लिंक नहीं है तो यह दर 20% हो सकती है)। इसी तरह बॉन्ड और डेट सिक्योरिटीज से मिलने वाला ब्याज भी आयकर रिटर्न में दिखाना जरूरी है।
कौन सा ITR फॉर्म चुनें?
केवल सैलरी और साधारण आय है - ITR-1
कैपिटल गेन है लेकिन बिजनेस इनकम नहीं है - ITR-2
अगर शेयर ट्रेडिंग ही आपका बिजनेस है - ITR-3
समय पर रिटर्न भरना क्यों जरूरी?
अगर आप तय समय सीमा यानी 15 सितंबर के बाद ITR दाखिल करते हैं, तो लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है। वहीं, इनकम छुपाने या गलत जानकारी देने पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है। समय पर और सही तरीके से रिटर्न भरना न केवल आपको पेनाल्टी से बचाएगा, बल्कि भविष्य में टैक्स संबंधित परेशानी से भी सुरक्षित रखेगा।
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