HDFC बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है। ब्याज की ये नई दरें 8 जून, 2024 से आधिकारिक तौर पर लागू हो चुकी हैं। बैंक के इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनका लोन पुराने इंटरनल बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है। अगर आपने भी बैंक से कर्ज लिया है, तो जान लीजिए कि इस बदलाव का आपकी जेब और मंथली बजट पर क्या असर होने वाला है।
लोन लेने वाले ग्राहकों की ईएमआई (EMI) अब अगली रीसेट डेट से बढ़ जाएगी। रिटेल लोन के लिए एक साल का MCLR सबसे अहम माना जाता है, जो अब बढ़कर ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। बैंकिंग सेक्टर में फंड की बढ़ती लागत और नकदी की कमी को देखते हुए बैंक ने यह कदम उठाया है। आज के आर्थिक माहौल में सही फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए ब्याज दरों में हुई इस बढ़ोतरी को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।

HDFC बैंक MCLR में बढ़ोतरी: जानें क्या हैं नई दरें
अलग-अलग अवधि (Tenure) के लिए ब्याज दरों में 5 से 10 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा किया गया है। उदाहरण के लिए, ओवरनाइट MCLR को मौजूदा मार्केट रेट्स के हिसाब से एडजस्ट किया गया है। हालांकि अब नए ग्राहकों के लोन रेपो रेट से लिंक होते हैं, लेकिन कई पुराने ग्राहक अब भी MCLR सिस्टम पर ही बने हुए हैं। अगली किस्त कटने से पहले अपना नया इंटरेस्ट शेड्यूल जरूर चेक कर लें, ताकि आप अपना मंथली बजट सही तरीके से मैनेज कर सकें।
| लोन की अवधि | नई MCLR दरें |
|---|---|
| ओवरनाइट | 8.95% |
| एक महीना | 9.00% |
| एक साल | 9.40% |
| तीन साल | 9.50% |
10 बेसिस पॉइंट्स की इस बढ़ोतरी से 50 लाख रुपये के लोन की EMI बढ़ जाएगी। अगर आपका लोन 20 साल जैसी लंबी अवधि का है, तो आपको कुल ब्याज के रूप में काफी ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। ग्राहकों को अपनी रीसेट डेट और लागू होने वाले मार्जिन को समझने के लिए अपना लोन एग्रीमेंट दोबारा देखना चाहिए। आमतौर पर बैंक ऐसे बदलावों की जानकारी मंथली स्टेटमेंट या SMS अलर्ट के जरिए देते हैं।
बढ़ती ब्याज दरों और EMI के बोझ को कम करने के टिप्स
अगर आपका लोन अभी भी MCLR से जुड़ा है, तो आपको इसे तुरंत स्विच करने पर विचार करना चाहिए। एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) चुनना ज्यादा पारदर्शी होता है और इसमें दरों में होने वाले बदलावों का फायदा ग्राहकों को तेजी से मिलता है। इसके अलावा, समय-समय पर छोटी-छोटी प्री-पेमेंट (Prepayments) करके भी आप लोन की अवधि और कर्ज का बोझ कम कर सकते हैं। बढ़ती ब्याज दरों के बीच अपनी गाढ़ी कमाई को बचाने का यही सबसे बेहतर तरीका है।


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