Bank Loan Recovery Agents: लोन लेना आज के समय में आम बात हो गई है, लेकिन कई बार आर्थिक तंगी या किसी अन्य वजह से लोगों की एक-दो ईएमआई छूट जाती हैं। इसके बाद शुरू होता है रिकवरी कॉल्स का सिलसिला, जो कई बार मानसिक तनाव का कारण बन जाता है। दिनभर बार-बार आने वाले फोन कॉल, तीखी भाषा में बातचीत, धमकियां और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कई लेंडर के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।

हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि बैंक और रिकवरी एजेंटों के लिए भी कुछ नियम तय किए गए हैं और वे किसी भी ग्राहक के साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकते। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि लोन रिकवरी के दौरान आपके क्या अधिकार हैं और आप गलत व्यवहार की स्थिति में क्या कदम उठा सकते हैं।
लोन की EMI न भर पाना तनावपूर्ण हो सकता है। कई उधार लेने वालों के लिए यह दबाव तब और बढ़ जाता है जब रिकवरी एजेंट बार-बार फोन करते हैं, परिवार के सदस्यों से संपर्क करते हैं या धमकी देते हैं। हालांकि लेंडर (कर्ज देने वालों) को बकाया राशि वसूलने का अधिकार है, लेकिन जानकारों का कहना है कि सही तरीके से वसूली की कोशिश और उत्पीड़न के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियम बनाए हैं कि बैंक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) और उनके रिकवरी एजेंट उधार लेने वालों के साथ कैसे व्यवहार कर सकते हैं। इन अधिकारों को समझने से ग्राहकों को बिना डरे मुश्किल स्थितियों का सामना करने में मदद मिल सकती है।
उत्पीड़न की शिकायतें आम हैं?
कर्ज चुकाने में मुश्किलों का सामना कर रहे लोग अक्सर धमकी भरे फोन कॉल, बुरे व्यवहार, बार-बार फ़ॉलो-अप और रिकवरी एजेंटों के परिवार के सदस्यों, सहकर्मियों या पड़ोसियों से संपर्क करने की शिकायत करते हैं।
आजकल उधार लेने वालों की सबसे ज्यादा शिकायतें धमकी भरे कॉल, बदतमीजी, अजीब समय पर बार-बार फ़ॉलो-अप करने और रिकवरी एजेंटों के परिवार के सदस्यों, सहकर्मियों या पड़ोसियों से संपर्क करने को लेकर होती हैं। हालांकि बैंकों को बकाया वसूलने का अधिकार है, लेकिन डराना-धमकाना, सबके सामने बेइज्जत करना या परेशान करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
रिकवरी एजेंट क्या नहीं कर सकते?
RBI की गाइडलाइंस के तहत, रिकवरी एजेंट को उधार लेने वालों के साथ व्यवहार करते समय कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना होता है।
- अजीब या गलत समय पर कॉल करना या घर आना
- अपमानजनक, धमकी भरी या डराने वाली भाषा का इस्तेमाल करना
- रिकवरी के लिए पड़ोसियों, दोस्तों, एम्प्लॉयर या परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क करना
- उधार लेने वालों को सबके सामने शर्मिंदा करना
- बिना किसी कानूनी आधार के गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई की धमकी देना
- सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा करना
जानकारों का कहना है कि लोन न चुका पाना (डिफॉल्ट) आम तौर पर एक सिविल मामला होता है। रिकवरी एजेंट के पास खुद उधार लेने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं होता है।
परेशान करना जारी रहता है, तो उधार लेने वालों को क्या करना चाहिए?
- हर चीज का रिकॉर्ड रखें
- कॉल रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट, मैसेज, ईमेल, तारीखें, नाम और फोन नंबर संभालकर रखें।
- सबसे पहले बैंक से शिकायत करें
- बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी या नोडल अधिकारी को लिखकर बताएं कि क्या-क्या उल्लंघन हुए हैं।
- RBI से शिकायत करें
- अगर समस्या हल नहीं होती है, तो उधार लेने वाले RBI के 'शिकायत प्रबंधन सिस्टम' (Complaint Management System) के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


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