इन 6 कारणों से आयकर विभाग आपको भेज सकता है नोटिस

फिलहाल कुछ ऐसे लोगों को भी नोटिस मिल सकती है जो कि टैक्‍स भरते समय कुछ गड़बड़ी कर देते हैं। तो ऐसे लोग जरा सावधान हो जाएं क्‍योंकि यहां पर बताए गए 6 कारणों से भी आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है।

जीएसटी लागू होने के बाद से टैक्‍स चोरों को पकड़ने में सरकार को काफी राहत मिली है। इसके वाबजूद भी लोग टैक्‍स चोरी करने के कई हथकंडे अपनाते रहते हैं। फिलहाल कुछ ऐसे लोगों को भी नोटिस मिल सकती है जो कि टैक्‍स भरते समय कुछ गड़बड़ी कर देते हैं। तो ऐसे लोग जरा सावधान हो जाएं क्‍योंकि यहां पर बताए गए 6 कारणों से भी आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। तो आइए जानते हैं इन 6 कारणों के बारे में-

यदि रिटर्न फाइल करने में देरी हुई

यदि रिटर्न फाइल करने में देरी हुई

समय से रिटर्न फाइल न करने पर आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से रिमाइंडर नोटिस आता है। यह उस एसेसमेंट इयर के अंत से पहले आता है जिसके लिए रिटर्न बकाया है। समय से रिटर्न फाइल नहीं करने पर आपको लेट फाइलिंग फीस देनी होगी। समयसीमा निकल जाने पर 31 दिसंबर, 2019 तक बिलेटेड रिटर्न भरा जा सकता है। इसके लिए 5,000 रुपये की पेनाल्टी देनी होगी। एक जनवरी, 2020 के बाद आईटीआर फाइल करने पर यह पेनाल्टी 10,000 रुपये से अधिक हो जाती है। इसके लिए बचाव का तरीका यह है कि समयसीमा खत्म होने से पहले आईटीआर फाइल कर दें।

शेयर्स में LTCG की गलत रिर्पोटिंग

शेयर्स में LTCG की गलत रिर्पोटिंग

लिस्टेड सिक्योरिटीज और मल्टीपल म्यूचुअल फंड से हुए लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) ITR फाइल करते समय समाप्त हो जाता है। 1 लाख रुपये तक के LTCG पर टैक्स नहीं है। इससे अधिक पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। वित्त वर्ष 2018-19 से इक्विटी पर LTCG को बताना थोड़ा जटिल हो सकता है। इस परिस्थिति में नोटिस से बचने के लिए ब्रोकर या सीधे म्यूचुअल फंड हाउस से कैपिटल गेंस का स्टेटमेंट हासिल कर लें। फ़ॉर्म में इसके अनुसार ही विवरण भरें। अपने अकाउंट स्टेटमेंट से LTCG कैलकुलेशन के बारे में क्रॉस चेक कर लें। ITR वेरिफिकेशन कैसै करें, जानिए यहां पर

फॉर्म 26AS के साथ TDS क्‍लेम का मेल नहीं खाना

फॉर्म 26AS के साथ TDS क्‍लेम का मेल नहीं खाना

ITR भरते समय देख लें कि फॉर्म 26AS और फॉर्म 16 में TDS के विवरण एक जैसे हों। इन कई कारणों से अंतर दिख सकता है। टीडीएस में मेल न खाने का नोटिस सेक्‍शन 43 (1) के तहत भेजा जाता है। इस दौरान नोटिस से बचने का तरीका यह है कि रिटर्न भरने से पहले सावधानी बर्तनी चाहिए। फॉर्म 26 एएस में रिपोर्ट किए गए टीडीएस को देख लेना चाहिए। सुनिश्चित कर लें कि क्या टीडीएस काटने वालों ने इसकी सही जानकारी दी है। इसके बाद ही फाइल करें। जानिए किसी और का इनकम टैक्‍स रिटर्न कैसे फाइल करें?

इनकम की सही जानकारी न देने पर

इनकम की सही जानकारी न देने पर

अलग-अलग स्रोतों जैसे बैंक, कंपनी, किराएदार, म्यूचुअल फंड एक्‍सचेंज आदि से अधिकारी इनकम के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसे आईटीआर में न दिखाने पर इनकम टैक्स का नोटिस मिल सकता है। इनकम को छुपाने के लिए सेक्शन 139 (9) या 143 (1) के तहत नोटिस भेजा जाता है। बचने का तरीका यह है कि सभी फाइनेंशियल स्टेटमेंट को जुटाना चाहिए। इनकम के स्रोत की लिस्ट बना लेनी चाहिए और फिर से ITR फाइल करना चाहिए।

पार्टनर पर किए गए निवेश का खुलासा न करने पर

पार्टनर पर किए गए निवेश का खुलासा न करने पर

बता दें कि कई बार लोग जीवनसाथी के नाम पर निवेश करते हैं लेकिन, अपने रिटर्न में इस तरह के निवेश से हुए इनकम को दिखाने के लिए भूल जाते हैं। यह कर योग्य इनकम होता है। इस पर टैक्स देना पड़ता है। तो नोटिस से बचने का तरीका है कि रिटर्न फाइल करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि जीवनसाथी के नाम पर किसी एसेट से कितनी इनकम हो रही है। इस पर कैसे टैक्स देने की जरूरत है।

गलत रिटर्न फाइल करने पर

गलत रिटर्न फाइल करने पर

फॉर्म में सही रिटर्न फाइल न करने से भी यह अमान्य माना जाता है। यह भी नोटिस मिलने की वजह बन सकता है। इस मामले में सेक्शन 139 (9) के तहत गलत रिटर्न भरने का नोटिस भेजा जाता है। गलत ITR फाइल करने पर आपको संशोधित ITR में फाइल फाइल करने की जरूरत होती है। बचाव का तरीका यह है कि जांच लें कि जिस फॉर्म में आप रिटर्न भर रहे हैं, वह सही है।

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