Share Market में इस समय 54% Stocks आपको Discount पर मिल रहे हैं? बाज़ार की गिरावट आपके लिए कुछ बेहद Attractive Stocks में खरीदारी का मौका बना रही है? आखिर इस गिरावट में एक्सपर्ट्स क्यों कह रहे हैं - मौका अभी शुरू हुआ है?
अगर आप हालिया मार्केट करेक्शन देखकर Share Marketr से दूरी बनाकर बैठे हैं, तो शायद अब दोबारा सोचने का समय आ गया है, क्योंकि कई बड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह घबराने का नहीं, बल्कि एक बड़ी "डिस्काउंट सेल" का फायदा उठाने का मौका हो सकता है। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता के बीच भारतीय बाजार अपने ऊपरी स्तरों से करीब 10% तक फिसल चुका है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह गिरावट डरने की वजह है, या फिर आने वाले 3 से 5 साल के लिए निवेशकों को मिलने वाला सबसे बड़ा मौका?
54% Nifty कंपनियां अब 2023 से सस्ते वैल्यूएशन पर

आंकड़े बताते हैं कि निफ्टी-50 की 54% कंपनियां आज 2023 के मुकाबले सस्ते वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही हैं। यानी जिन शेयरों को खरीदने के लिए निवेशक दो साल पहले उत्साहित थे, वही कंपनियां आज आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं। इसलिए बाजार में चल रही यह गिरावट कई विशेषज्ञों को एक छिपी हुई "डिस्काउंट सेल" जैसी दिखाई दे रही है।
TCS, Infosys और Reliance कितने सस्ते हुए?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय शेयर बाजार अपने ऊपरी स्तरों से लगभग 10% नीचे आ चुका है। लेकिन इस गिरावट के पीछे एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। बाजार से काफी हद तक अतिरिक्त उत्साह और ओवरवैल्यूएशन निकल चुका है, जिससे कई बड़ी कंपनियों के शेयर पहले की तुलना में अधिक आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच गए हैं।
सबसे ज्यादा असर IT और Consumer सेक्टर की बड़ी कंपनियों पर देखने को मिला है। Prabhudas Liladhar की रिपोर्ट के मुताबिक:
- TCS का Forward P/E, जो कभी 27.5 गुना तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब 14 गुना रह गया है।
- Infosys का वैल्यूएशन 25.2 गुना से गिरकर 15.4 गुना पर आ गया है।
- Reliance Industries, जो कभी 31.4 गुना के वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रही थी, अब करीब 19.6 गुना पर मिल रही है।
आसान शब्दों में कहें तो कई ब्लूचिप कंपनियां पहले की तुलना में काफी सस्ती हो चुकी हैं।
कंपनियों के वैल्यूएशन में इतनी गिरावट क्यों?
इसकी सबसे बड़ी वजह है अर्निंग ग्रोथ में सुस्ती। HDFC Securities का अनुमान है कि FY19 से FY24 के दौरान कंपनियों के मुनाफे में जो 18% CAGR की मजबूत ग्रोथ देखने को मिली थी, वह FY24 से FY27 के बीच घटकर करीब 9.5% रह सकती है। यानी कंपनियां आगे भी बढ़ेंगी, लेकिन पहले जैसी तेज रफ्तार से नहीं।
क्या हैं बड़े रिस्क?
HDFC Securities ने निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों के प्रति भी सतर्क किया है। ब्रोकरेज के अनुसार कमोडिटी कीमतों में तेजी और महंगे ईंधन की वजह से महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा संभावित El-Nino का खतरा भी बना हुआ है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर देश की खपत और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में रिजर्व बैंक की ब्याज दर नीति बेहद अहम हो जाती है। HDFC Securities का यह भी मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो सरकारी तेल कंपनियों यानी OMCs पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर पूरे ऑयल एवं गैस सेक्टर की कमाई पर पड़ सकता है।
FII बेच रहे हैं, घरेलू निवेशक टेंशन फ्री
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि जहां विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, वहीं देश के बड़े घरेलू फंड मैनेजर इस गिरावट को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहे। Nippon India Mutual Fund के CIO शैलेश राज भान का कहना है कि भारतीय बाजार को केवल FII फ्लो के आधार पर नहीं आंकना चाहिए। भारत की असली ताकत उसकी लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि है।
उनके मुताबिक यदि अगले 15 से 30 वर्षों तक भारत की रियल GDP ग्रोथ 6% से 7% के बीच बनी रहती है और उसमें 3% से 4% की नॉमिनल ग्रोथ भी जुड़ती है, तो निवेशकों की संपत्ति 11% से अधिक की दर से कंपाउंड हो सकती है। उनका मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी का इंतजार करना जरूरी नहीं है। घरेलू निवेशकों की ताकत के दम पर बाजार में रिकवरी पहले भी शुरू हो सकती है।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा दम?
बाजार में आई लगभग 10% की गिरावट के बाद कई एक्सपर्ट्स को आगे 10% से 15% तक का अपसाइड दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि बड़े संस्थागत निवेशक अपनी सेक्टर रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।
- HDFC Securities इस समय Financials, Industrials, Power, Real Estate, Chemicals और Consumer Discretionary सेक्टर को पसंद कर रही है। वहीं Energy, Cement और Telecom सेक्टर को लेकर अभी भी अंडरवेट रहने की सलाह दी जा रही है।
- दूसरी ओर प्रभुदास लीलाधर ने अगले 12 महीनों के लिए निफ्टी का बेस टारगेट 26,449 रखा है। उनके मॉडल पोर्टफोलियो में Metals, Capital Goods, Engineering, Defence और NBFC सेक्टर का वजन बढ़ाया जा रहा है।
2026 की सबसे बड़ी Wealth Creation Opportunity?
Experts का संदेश साफ है। अगले 12 महीने शायद तेजी से ट्रेडिंग करके पैसा कमाने के नहीं, बल्कि मजबूत और क्वालिटी शेयरों को धीरे-धीरे जमा करने के हो सकते हैं। अगर आप इस दौरान चरणबद्ध तरीके से निवेश करते हैं और धैर्य बनाए रखते हैं, तो यही गिरावट आने वाले 3 से 5 वर्षों में बड़ा वेल्थ क्रिएशन का अवसर साबित हो सकती है।
(Disclaimer: इस रिपोर्ट में व्यक्त किए गए विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव पूरी तरह संबंधित विश्लेषकों या संस्थाओं के व्यक्तिगत विचार हैं। ये Goodreturns.in or Greynium Information Technologies Private Limited के विचारों या आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हम यहां दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं देते, न ही उसका समर्थन करते हैं और न ही उसके लिए कोई जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। हम किसी भी प्रकार की निवेश सलाह प्रदान नहीं करते हैं और न ही किसी प्रतिभूति (Securities) की खरीद या बिक्री के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यहां उपलब्ध सभी जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए तथा आवश्यक होने पर किसी SEBI-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार या अन्य लाइसेंस प्राप्त वित्तीय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।)


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