नयी दिल्ली। आपका खाता जिस बैंक में है अगर वे बैंक डूब जाये यानी दिवालिया हो जाये तो आपको अपनी जमा राशि में से अधिकतम 1 लाख रुपये ही मिलेंगे। यानी अगर आपके 1 लाख रुपये से अधिक पैसे उस बैंक में जमा हैं और वे बैंक डूब जाये तो आपको 1 लाख रुपये से ज्यादा की सारी जमा राशि से हाथ धोना पड़ेगा। इस बात का खुलासा रिजर्व बैंक की सब्सिडरी डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) ने एक आरटीआई के जवाब में किया है। आपकी बैंक में कुल जमा राशि में से केवल 1 लाख रुपये ही इंश्योर होता है। डीआईसीजीसी एक्ट 1961 के सेक्शन 16(1) के तहत कोई भी बैंक अगर दिवालिया या डूबता तो सभी खाताधारकों को अधिकतम 1 लाख रुपये ही मिलेंगे। फिर चाहे उनके खाते में 1 लाख से ऊपर कितने भी पैसे जमा हो। यह कवर सभी तरह के खातों के लिए लागू होता है। यह नियम सभी घरेलू और विदेशी बैंकों, जिन्हें आरबीआई से भारत में संचालन का लाइसेंस मिलता है, पर लागू है।

वित्त मंत्री ने कही थी बढ़ाने की बात
डीआईसीजीसी ने कहा है कि बैंक जमा पर 1 लाख रुपये की बीमा सीमा बढ़ाने पर उसके पास "कोई सूचना नहीं" है। जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि सरकार की योजना संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बैंक जमा पर बीमा कवर को मौजूदा 1 लाख रुपये से बढ़ाने के लिए प्रस्ताव लाने की है। उन्होंने यह आश्वासन गैर-लाभकारी संगठन सहकार भारती द्वारा जमा बीमा सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाने के कुछ दिनों बाद दिया था। दरअसल यह माँग हाल के दिनों में कुछ बैंकों में सामने आयी गड़बड़ियों के कारण उठी है, जिससे लोगों की बचत खतरे में आ जाती है।
पीएमसी घोटाले के बाद बढ़ी डिमांड
महाराष्ट्र स्थित पंजाब ऐंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक में 4,355 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने पर आरबीआई ने खाताधारकों पर भी कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी थी। उनके लिए पैसे निकालने की लिमिट भी तय थी। मगर पीएमसी के खाताधारतों को चिंता थी उन्हें अपने जमा में से कितने रुपये मिलेंगे। क्योंकि बैंक डूबने पर अधिकतम 1 लाख रुपये मिलने का ही प्रावधान है। पीएमसी घोटाला सामने आने के बाद बैंक जमा के लिए बीमा लिमिट बढ़ाने की माँग उठी।
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