बदलाव का साल : जानिए क्या क्या बदले वित्तीय नियम

नयी दिल्ली। बैंक और फाइनेंशियल कंपनियाँ अपने और अपने ग्राहकों की सुविधाओं के चलते नियमों में बदलाव करती रहती हैं। साथ ही कभी-कभी उन्हें आरबीआई या सेबी की तरफ से नये दिशानिर्देशों के मुताबिक भी सुविधाओं और वित्तीय नियमों में बदलाव करने पड़ते हैं। मगर यह बदलाव ज्यादातर उपभोक्ताओं के पैसे की सुरक्षा और उनके हितों को ध्यान में रख कर किये जाते हैं। हालाँकि अकसर बैंकों द्वारा नियमों किये गये बदलाव ग्राहकों के अनुकूल नहीं होते हैं। इसका एक उदाहरण है बैंक खाते में न्यूनतम मासिक बैलेंस रखना और न रखने पर शुल्क लगाया जाना। इसी तरीके से देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने 2018-19 में कई नियमों में बदलाव किया। एसबीआई द्वारा जिन मामलों में नियम बदले गये इनमें चेक बुक, एनईएफटी, आरटीजीएस, एटीएम कार्ड तथा कैश निकालना और न्यूनतम मासिक बैलेंस शामिल हैं। एसबीआई के इन नियमों में से कुछ आपके लिए बेहतर हो सकते हैं। साथ ही कुछ नियम आपके लिए नकारात्मक हो सकते हैं। अगर आप एसबीआई ग्राहक हैं तो इन नियमों के बारे में जानना आपके लिए जरूरी है। आइये नजर डालते हैं ऐसे ही नियमों के बारे में।

चेक बुक के पेज और चेक रिटर्न पर जुर्माना

चेक बुक के पेज और चेक रिटर्न पर जुर्माना

एसबीआई ने चेक बुक में मुफ्त पेजों की संख्या कम कर दी। यानी देखा जाये तो चेक के जरिये लेन-देन और चेक बुक की कीमत दोनों महंगे हो गये। एसबीआई ने घोषणा की थी कि अब उसके बचत खाताधारकों को किसी वित्त वर्ष में केवल 10 मुफ्त चेक ही मिलेंगे। अब तक एक वित्त वर्ष में एसबीआई 25 मुफ्त चेक देता था। 10 के बाद और 10 चेक लेने के लिए आपको 40 रुपये देने होंगे। वहीं पहले 25 के बाद अगले 10 चेक के लिए 30 रुपये देने पड़ते थे। साथ ही एसबीआई ने एक अक्टूबर 2019 के बाद किसी तकनीकी समस्या के कारण चेक रिटर्न होने पर 150 रुपये और उस पर जीएसटी का शुल्क लगा दिया है। जीएसटी सहित यह चार्ज 168 रुपये है।

न्यूनतम बैलेंस में दी छूट

न्यूनतम बैलेंस में दी छूट

एसबीआई ने खाताधारकों को न्यूनतम बैलेंस रखने में राहत दी। एसबीआई ने मेट्रो शहरों में जरूरी मासिक न्यूनतम बैलेंस सीमा 5,000 रुपये से घटा कर 3,000 रुपये कर दी। वहीं अगर कोई बचत खाताधारक 3,000 रुपये नहीं रख कर 50 फीसदी यानी 1,500 रुपये कम रखता है तो उस पर 10 रुपये और जीएसटी वसूला जाएगा। अगर यह राशि 75 फीसदी से कम तो 15 रुपये और जीएसटी का जुर्माना लगेगा। वहीं अप्रैल तक यह चार्जेस काफी अधिक थे। अप्रैल तक यह शुल्क टैक्स के साथ 30-50 रुपये तक थे। वहीं 25,000 से 50,000 रुपये तक का मासिक बैलेंस रखने वाले एसबीआई की शाखा से 10 बार बिना शुल्क के पैसे निकाल सकेंगे, जबकि 50,000 रुपये से एक लाख रुपये तक रखने वाले जितनी मर्जी बार पैसे निकाल सकेंगे।

डेबिट कार्ड से खरीदारी का बिल ईएमआई पर चुकायें

डेबिट कार्ड से खरीदारी का बिल ईएमआई पर चुकायें

एसबीआई ने 2019 में अपने ग्राहकों के लिए बेहद शानदार सुविधा शुरू की। नयी सुविधा के तहत ग्राहकों को डेबिट कार्ड से खरीदारी करने के बाद ईएमआई में भुगतान करने की फैसिलिटी है। इस फैसिलिटी की सबसे बढ़िया बात यह है कि इसके लिए आपसे कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूला जायेगा। कोई सामान खरीदने के बाद आपको ईएमआई में इसके भुगतान के लिए 6 से 18 महीनों की अवधि का वक्त मिलेगा। इसके अलावा एसबीआई ने एनईएफटी के चार्जेस भी बदले। 10,000 रुपये तक की एनईएफटी पर 2 रुपये और जीएसटी, 2 लाख से ज्यादा की एनईएफटी पर 20 रुपये और जीएसटी 2 से 5 लाख तक की एनईएफटी पर 20 रुपये और जीएसटी लगेगा। मगर यहाँ आपको बता दें कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने बैंकों से जनवरी 2020 से एनईएफटी पर कोई चार्ज न लगाने को कहा है।

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