नयी दिल्ली। केंद्र सरकार के बाद अब वर्ल्ड बैंक ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर 5 फीसदी ही रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि 2020-21 में भारत की जीडीपी विकास दर सुधर कर 5.8 फीसदी रह सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि पहले वर्ल्ड बैंक ने 2019-20 के लिए भारत की विकास दर 6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था। मगर अब कुछ कारणों से वर्ल्ड बैंक ने अनुमानित विकास दर कम कर दी है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी नयी Global Economic Prospects रिपोर्ट में इसका मुख्य कारण एनबीएफसी यानी गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों की तरफ से कमजोर क्रेडिट और खपत में कमी को बताया है। 5 फीसदी विकास दर पिछले 11 सालों में सबसे निचला स्तर है। इससे पहले वित्त वर्ष 2008-09 में वैश्विक वित्तीय संकट से जब अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गयी तो उस समय 3.1 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था।

कैसी रहेगी वैश्विक विकास दर
वर्ल्ड बैंक और केंद्र सरकार से पहले 2019-20 में भारत की विकास दर के लिए आरबीआई ने भी 5 फीसदी का ही अनुमान लगाया था। वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल की तुलना में निवेश और व्यापार में धीरे-धीरे वापसी से वैश्विक आर्थिक विकास दर 2020 में 2.5 फीसदी रह सकती है। वहीं इस साल अमेरिका की विकास दर और गिर कर 1.8 फीसदी रह सकती है, जो चीन के साथ व्यापार युद्ध में बढ़ाये गये टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव और अनिश्चितता को दर्शाता है। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र में नरमी के कारण उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में 2020 में विकस दर 1.4 फीसदी तक फिसलने की संभावना है।
क्या है सरकार का अनुमान
दो दिन पहले सांख्यिकी मंत्रालय की तरफ से जारी किये गये आंकड़ों में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी विकास दर 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। मंत्रालय ने कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 140.78 लाख करोड़ रुपये के प्रोविजनल अनुमान की तुलना में 2019-20 में रियल जीडीपी 147.79 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर रह सकती है। 2018-19 में 6.8 फीसदी की विकास दर की तुलना में 2019-20 के दौरान वास्तविक जीडीपी में वृद्धि 5.0 फीसदी रह सकती है।
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