नयी दिल्ली। सांख्यिकी मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी विकास दर 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। सांख्यिकी मंत्रालय ने अपने अग्रिम अनुमान में कहा है कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 5 फीसदी रह सकती है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए 140.78 लाख करोड़ रुपये के प्रोविजनल अनुमान की तुलना में 2019-20 में रियल जीडीपी 147.79 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर रह सकती है। 2018-19 में 6.8 फीसदी की विकास दर की तुलना में 2019-20 के दौरान वास्तविक जीडीपी में वृद्धि 5.0 फीसदी रह सकती है। यह नंबर ऐसे समय में जारी किये गये हैं, जब भारतीय अर्थव्यवस्था में आश्चर्यजनक मंदी आयी है। यह जीडीपी के लिए पहले अनुमान हैं। सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करेगी। बजट के बाद दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किया जाएगा।

6 सालों के निचले स्तर पर विकास दर
भारत को कुछ समय पहले दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का खिताब मिला था। मगर देश की विकास दर 2019-20 की सितंबर तिमाही में 6 साल के निचले स्तर पर फिसल गयी थी। जुलाई-सितंबर में देश की विकास दर गिर कर 4.5 फीसदी रही थी। विकास दर में इस गिरावट का मुख्य कारण काफी हद तक निवेश में कमी था, जिससे खपत भी प्रभावित हुई। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में वित्तीय दबाव और कमजोर रोजगार सृजन भी इसमें शामिल रहा था। पिछले साल देश में बेरोजगारी भी 45 सालों के उच्च स्तर पर पहुँच गयी थी।
सरकार का लक्ष्य 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी
अर्थव्यवस्था में बेशक मंदी चल रही है, मगर सरकार ने 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा हुआ है। इस मामले पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बीते शनिवार को कहा था कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है, मगर कब तक ये बताना मुश्किल है। उनहोंने कहा था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश बेहद जरूरी है। दिसंबर में यूके की Centre for Economics and Business Research या सीईबीआर ने भी अपनी नयी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी थी कि मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में दो साल की देरी होगी।
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