नयी दिल्ली। मोदी सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर एक और बुरी खबर आयी है। सरकार के भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाला देश बनाने के लक्ष्य में देरी हो सकती है। एक नयी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। यूके में स्थित में Centre for Economics and Business Research या सीईबीआर ने अपनी नयी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के सपने में देरी होगी। दरअसल भारत, जिसे हाल ही में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का खिताब मिला था, की विकास दर 2019-20 की सितंबर तिमाही में 6 साल के निचले स्तर 4.5 फीसदी पर गिर गयी। विकास दर में इतनी गिरावट काफी हद तक निवेश में मंदी की वजह से आयी, जिससे खपत भी प्रभावित हुई। इसमें ग्रामीण इलाकों में वित्तीय दबाव और कमजोर रोजगार सृजन भी शामिल हैं। देश में बेरोजगारी पिछले 45 सालों के उच्च स्तर पर पहुँचने की बात भी सामने आयी थी।
कितनी होगी लक्ष्य में देरी
सीईबीआर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाला देश बन सकता है, जो सरकार के 2024 के लक्ष्य से दो साल अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत 2026 तक ही जर्मनी को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। वहीं जापान 2034 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। World Economic League Table 2020 नाम की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि भारत 2019 में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए फ्रांस और यूके दोनों से आगे निकल गया है।
जापान, जर्मनी और भारत में होगा मुकाबला
रिपोर्ट बताती है कि जापान, जर्मनी और भारत अगले 15 वर्षों में तीसरे स्थान के लिए मुकाबला करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के भारत को 2024 तक अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि "भारत वर्तमान सरकार के लक्ष्य की तुलना में 2 साल बाद 2026 तक 5 ट्रिलियन डालर की जीडीपी तक पहुंचने के लिए भी तैयार है।" 2019 वह साल रहा जब देश की अर्थव्यवस्था ने आखिरकार ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दिया। मगर रिपोर्ट कहती है कि "लेकिन, साल के दौरान धीमी विकास दर ने अधिक आक्रामक आर्थिक सुधारों के लिए दबाव बढ़ा दिया है।"
5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य पर उठे थे सवाल
हाल ही में प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन गोयनका ने कहा था ऑटो सेक्टर में मंदी के चलते भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश नहीं बन सकता। उन्होंने कहा था कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए ऑटो मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की वृद्धि दर 14 फीसदी होनी चाहिए। गोयनका ने कहा था कि 2025-26 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का मतलब है कि 8.5 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर यानी सीएजीआर होनी चाहिए। इसमें मैन्युफैक्चरिंग का 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य है यानी 12 फीसदी।
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