महंगाई ने आम आदमी का बजट बिलकुल हिला कर रख दिया है। बीते कल रविवार की रात से एलपीजी के दाम 50 रुपये बढ़ गये हैं। दूसरी ओर पेट्रोल डीजल की कीमतें भी आसमन छू रही हैं।
नई दिल्ली: महंगाई ने आम आदमी का बजट बिलकुल हिला कर रख दिया है। बीते कल रविवार की रात से एलपीजी के दाम 50 रुपये बढ़ गये हैं। दूसरी ओर पेट्रोल डीजल की कीमतें भी आसमन छू रही हैं। इसी कड़ी में सरकार ने आज थोक महंगाई दर का डेटा जारी किया है। ऐसे में अब जनवरी महीने में थोक महंगाई दर में भी उछाल आया है। जनवरी महीने में थोक महंगाई दर 2.03 फीसदी रही जबकि दिसंबर 2020 महीने में थोक मुद्रास्फीति दर 1.22 फीसदी थी। खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के बाद भी थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2021 में बढ़कर 2.03 प्रतिशत हो गयी। इसका मुख्य कारण विनिर्मित वस्तुओं के दाम में तेजी आना है। ताजे आंकड़ों में इसकी जानकारी मिली। झटका : प्याज हुआ महंगा, 15 दिनों में दोगुना से ज्यादा बढ़े दाम

थोक डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति इससे पहले दिसंबर 2020 में 1.22 प्रतिशत और जनवरी 2020 में 3.52 प्रतिशत थी। आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की थोक मुद्रास्फीति जनवरी 2021 में शून्य से 2.8 प्रतिशत नीचे रही। यह एक महीने पहले यानी दिसंबर 2020 में शून्य से 1.11 प्रतिशत नीचे थी। इस दौरान सब्जियों की थोक मुद्रास्फीति शून्य से 20.82 प्रतिशत नीचे और ईंधन एवं बिजली की मुद्रास्फीति शून्य से 4.78 प्रतिशत नीचे रही। हालांकि आलू की थोक मुद्रास्फीति इस दौरान 22.04 प्रतिशत रही। गैर-खाद्य श्रेणी में मुद्रास्फीति इस दौरान 4.16 प्रतिशत रही।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पांच फरवरी को मौद्रिक नीति घोषणा में ब्याज दरों को लगातार चौथी बैठक में अपरिवर्तित रखा। रिजर्व बैंक ने घोषणा करते हुए कहा था कि निकट-भविष्य में मुद्रास्फीति का परिदृश्य अनुकूल हुआ है।
खुदरा महंगाई 16 माह के निचले स्तर पर
जनवरी में खुदरा महंगाई दर में गिरावट आई है। इकोनॉमिक गतिविधियों में रिकवरी के संकेत दिखने लगे हैं। दिसंबर 2020 में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 1 फीसदी की पॉजिटिव ग्रोथ रही जबकि जनवरी 2021 में खुदरा महंगाई 16 महीने के निचले स्तर 4.06 फीसदी पर पहुंच गई। आंकड़ों के मुताबिक मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन के चलते औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ बेहतर रही। मैनुफैक्चरिंग सेक्टर की इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में 77.63 फीसदी हिस्सेदारी रहती है और दिसंबर 2020 में इसकी 1.6 फीसदी ग्रोथ रही। दिसंबर 2020 में माइनिंग आउटपुट में 4.8 फीसदी की गिरावट रही जबकि पॉवर जेनेरेशन में 5.1 फीसदी की बढ़ोतरी रही।
आईआईपी डेटा के मुताबिबक दिसंबर 2020 में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स आउटपुट में 4.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि दिसंबर 2019 में यह आंकड़ा 5.6 फीसदी था। नॉन-ड्यूरेबल गु्ड्स की बात करें तो इसका प्रोडक्शन दिसंबर 2019 में 3.2 फीसदी के गिरावट की तुलना में दिसंबर 2020 में 2 फीसदी बढ़ा। दिसंबर 2019 में आईआईपी में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी रही थी। पिछले साल 2020 में कोरोना महामारी के चलते इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले साल मार्च में आईआईपी में 18.7 फीसदी की गिरावट रही थी।
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