नयी दिल्ली। खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दिसंबर में थोक महंगाई दर 2.59 फीसदी पर पहुँच गयी। जबकि नवंबर में यह सिर्फ 0.58 फीसदी रही थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से थोक महंगाई पर ताजा आँकड़े जारी किये गये हैं। एक साल पहले की अवधि में देखें तो दिसंबर 2018 में थोक महंगाई दर 3.46 फीसदी रही थी। नवंबर में 11 फीसदी के मुकाबले दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति दर बढ़कर 13.24 फीसदी हो गई। खाद्य उत्पादों की कैटेगरी में नवंबर में प्याज की महंगाई दर 172.3 फीसदी की तुलना में जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ 455.8 फीसदी रही, जबकि सब्जियों की थोक महंगाई दर 45.32 फीसदी से 69.69 फीसदी पर पहुँच गयी। हालांकि दालों की कीमतों में थोड़ी राहत मिली है। दालों पर थोक महंगाई 16.59 फीसदी से कम होकर 13.11 फीसदी पर आ गयी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थोक महंगाई सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई में खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी 15.26 फीसदी होती है।

खुदरा महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर
सोमवार को पेश किये गये आंकड़ों के मुताबिक खुदरा महंगाई दर भी 5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में खुदरा महंगाई दर उछल तक 7.35 फीसदी हो गई। यानी महंगाई के मामले में दो दिनों आम जनता के लिए दो बुरी खबरें आयी हैं। बता दें कि खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक या आरबीआई के अनुमान से भी अधिक हो गयी है। आरबीआई का इसके लिए अनुमान 2 से 6 फीसदी है। वैसे कोर महंगाई दर इस समय 3.7 फीसदी है, मगर पिछले साल के मुकाबले ये भी थोड़ी ज्यादा है।
क्या होती है थोक और खुदरा महंगाई दर
देश नीति निर्माण में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर को उपयोग में लाया जाता है। थोक बाजार में वस्तुओं के समूह की कीमतों में सालाना आधार पर कितनी वृद्धि हुई है इसका आकलन महंगाई के थोक मूल्य सूचकांक के जरिये किया जाता है। वहीं खुदरा महंगाई दर जनता को सीधे प्रभावित करती है और ये खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 45 फीसदी है।
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