Unified Pension Scheme: आखिर क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम? बस 5 प्वांइट्स में समझें कैसे ये है NPS से अलग?

Unified Pension Scheme: सरकारी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक खुशखबरी दी है। कैबिनेट की बैठक में ओल्ड पेंशन स्कीम और न्यू पेंशन स्कीम की जगह अब यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लागू करने का फैसला लिया है। यह मौजूदा नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के साथ ही लागू रहेगा। यूपीएस के तहत कर्मचारियों को 25 साल काम करने पर पूरी पेंशन मिलेगी। आइए इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं और ये भी बताते हैं कि किस प्रकार से ये एनपीएस से अलग है।

ups vs nps

आखिर क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम? (What is Unified Pension Scheme)

सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत सरकारी कर्मचारियों के लिए एक निश्चित पेंशन स्कीम का प्रावधान किया जाएगा। इसमें कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद फिक्स्ड पेंशन स्कीम दी जाएगी। पेंशन को सरकारी कर्माचारी के रिटायरमेंट से ठीक पहले के 12 महीनं के ऐवरेज मूल वेतन का 50% होगी पर इसमें अहम बात ये है कि इसका फायदा उन्ही कर्मचारियों को मिलेगा जो कम से कम 25 साल तक नौकरी कर चुके हैं।(UPS vs NPS)

इसके अलावा अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक नौकरी करने के बाद रिटायर होता है तो उसे पेंशन के रूप में 10000 रुपये दिए जाएंगे। इस स्कीम के तहत पारिवारिक पेंशन देने का भी निर्णय लिया गया है। ये पेंशन कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को दी जएगी। वहीं, इसमें कर्मचारी को उसकी नौकरी के आखिरी महीने का वेतन और भत्ता एक एकमुश्त अमाउंट के तौर पर दिया जाएगा और कर्माचारी के आखिरी बेसिक सैलरी का 1/10वां हिस्सा होगा।

इन 5 प्वांइट्स में समझें कैसे यूनिफाइड पेंशन स्कीम और नेशनल पेंशन सिस्टम एक दूसरे से हैं अलग (Differences Between UPS and NPS)

1.एनपीएस में कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए का 10 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है। इसमें सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी हिस्सा देती है। वहीं, UPS में हर 6 महीने की सर्विस के बदले मासिक वेतन (वेतन + डीए) का दसवां हिस्सा जुड़ कर रिटायरमेंट पर दिया जाता है।

2. एनपीएस शेयर बाजार से लिंक योजना है। इसलिए ये निवेश जोखिमभरा है। साथ ही कुछ परिस्थितियों में टैक्स भी देना होता है। वहीं, यूपीएस शेयर बाजार पर आधारित नहीं होता है और। इसी कारण से इसमें निवेश से के समय कोई जोखिम नहीं होता है।

3. एनपीएस में इसमें 6 महीने बाद मिलने वाले महंगाई भत्ते का प्रावधान नहीं है और रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं होती। यह एन्युटी पर निर्भर करती है। कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 10 फीसदी हिस्सा कॉन्ट्रिब्यूट करना होता है। इसमें सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी हिस्सा देती है। इस स्कीम में रिटायरमेंट पर पेंशन पाने के लिए एनपीएस फंड की कम से कम 40 फीसदी रकम की एन्युटी लेनी होती है।

वहीं, यूपीएस में रिटायरमेंट के बाद फिक्स पेंशन मिलेगी। यह रिटारयमेंट के ठीक पहले के 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी होगी लेकिन इसका फायदा उन्हें ही को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 25 साल नौकरी की हो। अगर कोई शख्स 10 साल नौकरी करके नौकरी छोड़ता है तो उसे हर महीने कम से कम 10 हजार रुपये की पेंशन मिलेगी।

4. एनपीएस के अकाउंट होल्‍डर की मृत्‍यु होने पर निवेश की राशि का भुगतान नॉमिनी को किया जाता है। अगर नॉमिनी पेंशन लेने का इच्‍छुक है तो उसे इसके लिए एन्‍युटी खरीदनी होगी। कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को कर्मचारी की पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा मिलेगा। वहीं, यूपीएस में कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में परिवार को कर्मचारी की पेंशन का 60 फीसदी हिस्सा मिलेगा।

5.एनपीएस में प्राइवेट कंपनी में जॉब करने वाला शख्स भी निवेश कर सकता है और इसके फायदे उठा सकता है। इसके अलावा जो भी लोग रिस्क लेकर हाई रिटर्न पाना चाहते हैं, वे इस स्कीम में निवेश कर सकते हैं और रिटायरमेंट के बाद पेंशन पा सकते हैं। यूपीएस का फायदा मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा लेकिन राज्य सरकारों को भी ये ऑप्शन दिया गया है।

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