रेल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। रेल से यात्रा करने वाले यात्रियों को जल्द एक बड़ा झटका लगने वाला है। लगातार घाटे में चल रही रेलवे यात्री किराए में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।
नई दिल्ली: रेल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। रेल से यात्रा करने वाले यात्रियों को जल्द एक बड़ा झटका लगने वाला है। लगातार घाटे में चल रही रेलवे यात्री किराए में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। भारतीय रेलवे ट्रेन किराए में बढ़ोतरी कर सकती है। जी हां आने वाले कुछ ही दिनों में किराया बढ़ने वाला है। रेलवे बोर्ड को इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए रेल अधिकारियों के बीच मंथन शुरू हो चुका है।
किराये में हो सकता 15% से 20% तक का इजाफा
मिली जानकारी के मुताबिक रेलवे सबअर्बन ट्रेनों से लेकर मेल/एक्सप्रेस के हर क्लास के किराये में बढ़ोतरी करने जा रहा है। यह बढ़ोतरी 5 पैसे प्रति किलोमीटर से लेकर 40 पैसे प्रति किलोमीटर तक हो सकती है। इस तरह से रेलवे के हर क्लास के किराये में 15 से 20% तक इजाफा हो जाएगा। इस बढ़े हुए किराये का ऐलान दिसंबर के अंत तक होने की संभावना है जबकि बढ़ा किराया 1 फरवरी 2020 से लागू हो सकता है। रेलवे ने पिछली बार साल 2014 में उस वक़्त नई सरकार बनने के बाद किराये में करीब 15% की बढ़ोतरी की थी। मौजूदा समय में रेलवे में लागत से औसतन 43% कम किराया वसूला जाता है।
रेलवे को उठाना पड़ रहा इतना नुकसान
वहीं अगर अलग-अलग क्लास की बात करें तो रेलवे को सब अर्बन ट्रेनों के किराये पर क़रीब 64% का नुकसान उठाना पड़ता है। जबकि नॉन सब अर्बन ट्रेन के सवारी डिब्बों पर 40% का नुकसान होता है। वहीं एसी 1 पर क़रीब 24% का नुकसान, एसी 2 पर क़रीब 27% नुकसान, स्लीपर क्लास से क़रीब 34% का नुकसान और चेयर कार से क़रीब 16% का नुकसान होता है। रेलवे को केवल एसी 3 क्लास की सवारियों को ढोने में फायदा होता है जो कि क़रीब 7% है। इसी हफ़्ते सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे के आर्थिक हालात पर चिंता जताई थी। Airtel यूजर्स अब बिना नेटवर्क के भी कर पाएंगे कॉल, जानिए कैसे?
रेलवे ने 66% तक घटाए नेट रेवेन्यू सरप्लस
वहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे का नेट रेवेन्यू सरप्लस 66% तक कम हो गया है। यह साल 2016-17 में 4913 करोड़ रुपये जबकि साल 2017-18 में घटकर 1665.61 करोड़ रुपये के करीब हो गया। जबकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रेलवे की अपनी कमाई भी 3 फ़ीसदी कम हो गई जिसकी वजह से ग्रॉस बजटरी सपोर्ट पर इसकी निर्भरता बढ़ गई। सीएजी के मुताबिक रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 98.44 हो गया। यानी 100 रुपये कमाने के लिए उसे 98 रुपये से ज़्यादा रकम खर्च करनी पड़ती है। यानी सीएजी रिपोर्ट भी रेलवे के किराये में बढ़ोतरी की ज़रूरत पर जोर दे रहा है।


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