नयी दिल्ली। केंद्र सरकार को अगले 5 सालों राजकोषीय दबाव को देखते हुए पीएसयू या सरकारी कंपनियों के विनिवेश की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए केंद्र सरकार भेल, गेल इंडिया, हिंदुस्तान जिंक और नैल्को में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। ब्रोक्रेज फर्म सीएलएसए ने अनुमान लगाया है कि राजकोषीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए कम राजस्व प्राप्ति और टैक्स में कटौती के चलते मोदी सरकार और विनिवेश कर सकती है। सरकार अब जिन पीएसयू कंपनियों का विनिवेश कर सकती है हॉन्ग-कॉन्ग में स्थित सीएलएसए ने इसके लिए भेल, गेल इंडिया, हिंदुस्तान जिंक और नैल्को की पहचान की है। सीएलएसए के मुताबिक सरकार ने पिछले तीन वर्षों में ईटीएफ के जरिये से पीएसयू शेयरों की बिक्री के माध्यम से 12 अरब डॉलर कमाये हैं। इस तरह की अधिक बिक्री से उन कंपनियों पर आपूर्ति दबाव बढ़ेगा, जिनमें सरकार की विनिवेश की योजना नहीं है। वहीं सीएलएसए ने इस बात की भी संभावना जतायी है कि सरकार मौजूदा वित्त वर्ष में भारत पेट्रोलियम का प्राइवेटाइजेशन नहीं कर सकेगी।
1.05 लाख करोड़ रुपये का है विनिवेश लक्ष्य
आपको बता दें कि चालू वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों के विनिवेश से केंद्र सरकार ने 1.05 लाख करोड़ रुपये का जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार इस लक्ष्य को पूरा करना चाहती है। साथ ही आपको दें कि सरकार अपने रेवेन्यू जनरेशन के लिए टैक्स कलेक्शन पर मुख्य रूप से निर्भर करती है। मगर भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण सरकार का कंपनियों से जीएसटी कलेक्शन उम्मीद से कम है। सीएलएसए के अनुमान के मुताबिक कम टैक्स कलेक्शन और सरकार द्वारा दिये गये राहत पैकेज से चालू वित्त वर्ष में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी हो गयी है।
कम टैक्स कलेक्शन है विनिवेश की बड़ी वजह
कम टैक्स कलेक्शन के कारण सरकार को पीएसयू कंपनियों में विनिवेश के लिए एग्रेसि रुख अपनाना पड़ रहा है। अपने वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस समय सरकार आक्रामक रूप से एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम को बेचने पर काम रही है। गौरतलब है कि केंद्र ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद का 3.3% राजकोषीय घाटा लक्ष्य निर्धारित किया है। सीएलएसए ने अपने एक और अनुमान में बताया है कि अगर सरकार की योजना और टैक्स घटा कर लोगों के हाथ में पैसे देने की है तो विनिवेश लक्ष्य और बढ़ सकता है।
कैसे होता है विनिवेश
सरकार के पास पीएसयू कंपनियों में विनिवेश के लिए कई रास्ते होते हैं। इनमें आईपीओ के जरिये किसी कंपनी में हिस्सेदारी बेचना शामिल है, जिसके बाद कंपनी स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होती है। एक दूसरा तरीका है ईटीएफ। सरकार के भारत-22 ईटीएफ में कुल 22 सरकारी कंपनियाँ हैं, जिसका इश्यू लाकर सरकार इनमें विनिवेश करके पूँजी जुटाती है। इन 22 कंपनियों में ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, एसबीआई, भारत पेट्रोलियम, कोल इंडिया, नैल्को, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियर्स इंडिया, एनबीसीसी, एनटीपीसी, एनएचपीसी, एसजेवीएनएल, गेल, पावर ग्रिड और एनएलसी इंडिया शामिल हैं।
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