Share Market: में कल की भारी गिरावट के बाद आज रिकवरी देखने को मिली। दोपहर 3:00 बजे तक BSE Sensex 452.11 अंक यानी 0.59% की बढ़त के साथ 76,955.71 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, NSE Nifty 50 142.35 अंक यानी 0.60% चढ़कर 24,024.40 पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान Nifty ने 24,134.70 का दिन का उच्चतम स्तर (High) और 23,927.70 का निचला स्तर (Low) बनाया। वहीं, Sensex 77,326.65 के हाई और 76,576.14 के लो तक पहुंचा। बाजार में शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांक दिनभर हरे निशान में कारोबार करते रहे।
निफ्टी के गिरने और चढ़ने वाले-
अगर निफ्टी 50 के शेयरों की बात करें तो Sun Pharma, Bajaj Finance, Bharti Airtel, IndiGo और Eternal सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयर रहे। वहीं Dr. Reddy's Laboratories, Maruti Suzuki, NTPC, Infosys और Axis Bank पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। सेक्टोरल इंडेक्स में भी अच्छी मजबूती रही। Nifty Realty सबसे ज्यादा करीब 3.37% चढ़ा, जबकि Nifty Media में 2.24% की तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Nifty Auto और Nifty IT में हल्की कमजोरी देखने को मिली।
क्रूड प्राइस में गिरावट-
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कारोबारी सत्र में तेज गिरावट के बाद आज निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग (Value Buying) की। इसके अलावा जून तिमाही के नतीजों की शुरुआत भी निवेशकों के लिए अहम बनी हुई है। बाजार की नजर अब आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है, जिनसे आगे की दिशा तय हो सकती है।
वैश्विक मोर्चे पर अनिश्चितता-
हालांकि, वैश्विक मोर्चे पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर होने वाले संभावित फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं Iran-US-Israel के बीच जारी तनाव और मध्य पूर्व की स्थिति भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
Crude oil की कीमतों में बड़ा उछाल नहीं-
फिलहाल Crude Oil की कीमतों में बड़ी उछाल नहीं आई है, जिससे भारतीय बाजार को कुछ राहत मिली है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में स्थिरता महंगाई और कंपनियों की लागत के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती है। अब निवेशकों की नजर ट्रंप के बयान के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की चाल, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी, जो आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
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