एक समय पर भारतीय बाजार के दिग्गज रहे अनिल अंबानी के दिन काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। मुसीबत जैसे कम होने का नाम नहीं ले रही है। सेबी) ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी को तगड़ा झटका दिया है।
नई दिल्ली, फरवरी 12। एक समय पर भारतीय बाजार के दिग्गज रहे अनिल अंबानी के दिन काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। मुसीबत जैसे कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। जी हां शुक्रवार को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं बोर्ड (सेबी) ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मुखिया अनिल अंबानी को तगड़ा झटका दिया है। सेबी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, उद्योगपति अनिल अंबानी और तीन अन्य व्यक्तियों को कंपनी से संबंधित कथित धोखाधड़ी गतिविधियों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। तीन अन्य व्यक्ति अमित बापना, रवींद्र सुधाकर और पिंकेश आर शाह हैं।

अगले आदेश तक के लिए पाबंदी
नियामक ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि इकाइयों को सेबी के साथ पंजीकृत किसी भी मध्यस्थ, किसी भी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या किसी भी सार्वजनिक कंपनी के कार्यवाहक निदेशकों/प्रवर्तकों के साथ खुद को संबद्ध करने पर रोक लगा दी है, जो पूंजी जुटाने का इरादा रखते हैं। ये पाबंदी अगले आदेश तक के लिए है।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन रिलायंस होम फाइनेंस का हाल
अनिल अंबानी की प्रतिबंधित कंपनी रिलायंस होम फाइनेंस के शेयर में भारी दबाव है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शेयर का भाव 1.40 फीसदी गिरावट के साथ 4.93 रुपए था। कंपनी के मार्केट कैपिटल की बात करें तो 238.89 करोड़ रुपए है। वहीं पूंजी बाजार नियामक सेबी ने एनएसई और उसके पूर्व प्रबंध निदेशकों तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारियों चित्रा रामकृष्ण और रवि नारायण तथा अन्य पर जुर्माना लगाया है। ये जुर्माना समूह परिचालन अधिकारी और प्रबंध निदेशक (एमडी) के सलाहकार के रूप में आनंद सुब्रमण्यन की नियुक्ति में प्रतिभूति अनुबंध नियमों के उल्लंघन को लेकर लगाया गया है। कमाल : बेटी हो जाएगी लखपति, इस सरकारी स्कीम में करें निवेश
करोड़ों रुपए के लोन मामले अभी भी बकाया
बैंक ऑफ़ बड़ौदा के द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट को आधार बनाते हुए सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि आरएचएफएल की किताबों में 8884.6 करोड़ों रुपए के लोन मामले अभी भी बकाया हैं। 8,884.46 करोड़ रुपये की राशि पहले 43 संभावित अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी संस्थाओं या पाइल को हस्तांतरित की गई थी, जिसमें से 8,847.74 करोड़ रुपये की राशि 19 संस्थाओं को हस्तांतरित की गई थी। इसमें से 14 इकाइयां कथित तौर पर समूह की कंपनियां और अन्य पाइल इकाइयां थीं। जिनका प्रमोटर ग्रुप (अनिल अंबानी ग्रुप) के साथ घनिष्ठ संबंध था।
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