नयी दिल्ली। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शनिवार को कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। मगर उन्हें इसके लिए सरकार के 2024-25 तक के लक्ष्य को लेकर संदेह है। मोदी सरकार ने 2024 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का लक्ष्य रखा है। फिक्की के एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश बेहद जरूरी है। पिछले महीने यूके में स्थित में Centre for Economics and Business Research या सीईबीआर ने भी अपनी नयी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी थी कि मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में देरी होगी। सीईबीआर ने अपनी रिपोर्ट बताया था कि भारत 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी वाला देश बन सकता है, जो सरकार के 2024 के लक्ष्य से दो साल अधिक है।

'5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में कोई शक नहीं'
एसबीआई प्रमुख का कहना है भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में कोई शक नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या हम यह लक्ष्य 5 साल में हासिल कर पायेंगे, ये कहना बहुत मुश्किल है। उन्होंने इसके लिए प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बेहद जरूरी कहा। उनके मुताबिक अकेले सरकारी निवेश के जरिय इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता हैं, बल्कि इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भारी निवेश की आवश्यकता है, जिसके नतीजे में जीडीपी को बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर फिक्की प्रेसिडेंट संगीता रेड्डी ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती है और सरकार को हालात सुधारने के लिए 1-2 लाख करोड़ रुपये की पूँजी लगाने की जरूरत है।
निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर को गति देने की जरूरत
रेड्डी का मानना है कि एक बार फिर निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर को गति देने के लिए सरकार को अर्थव्यवस्था में कम से कम एक-दो लाख करोड़ रुपये डालने के तरीके खोजने होंगे। उनके मुताबिक हर सेक्टर में लंबित बिल बढ़ रहे हैं और सेंटिमेंट को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जिससे अर्थव्यवस्था को फिर से गति मिलेगी। रेड्डी ने कहा कि 5-ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य केवल सरकार या इंडस्ट्री द्वारा हासिल नहीं किया जा सकता है। इसे हासिल करने के लिए उन्हें एक साथ ताली बजानी चाहिए।
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