Global Petrol-Diesel Price: चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा तेल का खरीदार बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल चीन ने 10.7 करोड़ टन की रिकॉर्ड क्रूड ऑयल की खरीददारी की। यह तेल चीन के द्वारा रूस से खरीदा गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह आंकड़ा साल 2022 के मुकाबले एक चौथाई ज्यादा था। चीन के सबसे बड़े ऑयल सप्लायर के मामले में रूस ने अब सऊदी अरब को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके साथ ही चीन दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल इंपोर्टर बन चुका है। अगर बात की जाए सऊदी अरब की तो उसने चीन को पिछले साल 8.6 करोड़ टन का क्रूड बेचा।
मिल रही जानकारी के मुताबिक साल 2018 में भी चीन का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर रूस रहा था। पिछले साल भारत में रूस से रोजाना 17.9 लाख बैरल क्रूड खरीदा गया, वहीं चीन ने रोजाना 21.5 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। पिछले साल चीन ने रूस से 60 अरब डॉलर से ज्यादा कच्चा तेल खरीदा और इसकी एवरेज प्राइस करीब 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही।

आखिर रूस से महंगा तेल क्यों खरीद रहा है चीन
वेस्टर्न कंट्रीज ने रूस से तेल पर 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप लगा रखा है। चीन इससे महंगी कीमत पर रोज से तेल खरीद रहा है और वह कीमत कहीं और भी ऊंची है। चीन रूस से महंगी दरों पर तेल खरीद कर भी चीन को फायदा है और वह इसलिए क्योंकि चीन को वहां से तेल ले आना काफी सस्ता पड़ रहा है, क्योंकि रूस से चीन तक का शिपिंग एरिया काफी छोटा है, जिससे शिपिंग कॉस्ट में काफी बचत हो जाती है। वहीं सऊदी अरब से तेल मनाने के लिए चीन को रूस की तुलना में महंगा पड़ता है, इसी कारण चीन ने रूस से तेल सप्लाई को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।
चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर बन चुका है। अगर पिछले साल के आंकड़ों को देखा जाए तो चीन को तेल सप्लाई करने की लिस्ट में इराक तीसरे नंबर पर और मलेशिया चौथे नंबर पर बरकरार था। आपकी जानकारी के लिए बता दे की चीन ने ईरान साउथ ईस्ट एशिया देश के रूप में ईरान से आने वाले क्रूड ऑयल को शामिल किया था।
चीन के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल रूस ने चीन को 96 लाख टन फ्यूल ऑयल बचा था वही मलेशिया 63.9 लाख टन के तेल एक्सपोर्ट के साथ दूसरे नंबर पर रहा। चीन को दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक माना जाता है, लेकिन फिर भी उसका ज्यादातर क्रूड ऑयल इंपोर्ट किया जाता है।
यूक्रेन और रूस में छिड़े हुए युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल सप्लाई को काफी हद तक काम कर दिया और इसका असर रूस की इकोनॉमी पर भी पड़ रहा था। हालांकि चीन और भारत ने इस दौरान रूस से अपनी तेल की सप्लाई को बरकरार रखा। वहीं चीन ने तो पश्चिमी देशों से ज्यादा कीमत पर रूस से कच्चा तेल खरीदा है। हालांकि चीन को यह महंगा तेल भी कम शिपिंग चार्ज की वजह से अन्य देशों के मुकाबले सस्ता पड़ रहा था।
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