नयी दिल्ली। केंद्र सरकार का कहना है कि कई राज्य कम कीमत पर भी आयात की गयी प्याज खरीदने में कोई रुचि नहीं दिखा रही हैं। पिछले कुछ महीनों में प्याज को लेकर मचे हाहाकार के बीच राज्य सरकरों के इस रवैये से केंद्र सरकार परेशान है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों को 22 रुपये प्रति किलो पर प्याज दे रही है, मगर राज्य सरकारें खरीदारी को लेकर एक्विट नहीं हैं। ऐसा तब है जब प्याज के लिए परिवहन का खर्च भी केंद्र सरकार ही उठा रही है। पासवान ने कहा कि लगभग 18,000 टन प्याज का आयात किया गया है, लेकिन सभी प्रयासों के बाद भी केवल 2,000 टन प्याज ही बेची गयी है। उन्होंने बताया कि मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि सरकार प्याज उपलब्ध कराने के लिए सभी प्रयास कर रही है। पासवान के मुताबिक सरकार प्याज की कीमतों पर नजर रखे हुए और समय आने पर इस पर कार्रवाई करेगी।

इन राज्यों ने खरीदी केंद्र सरकार से प्याज
केंद्र सरकार परिवहन खर्च वहन करते हुए नो प्रोफिट नो लॉस की पॉलिसी पर काम कर रही है। अब तक, आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने केंद्र से प्याज की खरीद की है। बल्कि कई राज्यों ने तो अपनी मांग ही वापस ले ली है। सरकार ने 45,000 टन प्याज के लिए समझौते किये हैं, जिनमें से 18,500 टन प्याज विदेशों से भारत आ गयी है। सरकार ने इतने प्याज का आयात आपूर्ति बढ़ा कर कीमतों को नियंत्रण करने के लिए किया।
सरकार बनायेगी बफर स्टॉक
इस साल के प्याज संकट को दोबारा आने से रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने 2020 में 1 लाख टन के प्याज का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 56,000 टन का बफर स्टॉक बनाया था, लेकिन यह कीमतों को नियंत्रण रखने के लिए पर्याप्त नहीं था, जो अभी भी देश भर के अधिकांश शहरों में 100 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चल रही हैं। नतीजतन सरकार एमएमटीसी के माध्यम से प्याज का आयात करने के लिए मजबूर हो गयी।
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