नयी दिल्ली। 2019 में प्याज की कीमतों को लेकर बहुत हाहाकार रहा। आपूर्ति में कमी के चलते प्याज के दाम कई गुना बढ़ गये। कई जगह तो यह आम आदमी के बजट से ही बाहर हो गये। बेमौसम बरसात और कहीं देर से हुई बारिश ने प्याज की उपज को प्रभावित किया, जिससे कीमतें आसमान छूने लगीं। कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दिया, जिसके लिए अफगानिस्तान से लेकर मिस्र तक से प्याज का आयात किया गया। वहीं चीन से भी प्याज मंगायी गयी। सरकारी कंपनी एमएमटीसी, जो सरकार की ओर से आयात कर रही है, ने तुर्की, अफगानिस्तान और मिस्र से लगभग 45,000 टन प्याज के लिए कॉन्ट्रैक्ट किये हैं। इस प्याज की शिपमेंट का काम चल रहा है। मगर नये साल में ऐसी अफरा-तफरी न हो इसके लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आइये जानते हैं सरकार की तैयारी के बारे में।
बनाया जायेगा बफर स्टॉक
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा है कि इस साल के प्याज संकट को दोबारा आने से रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने 2020 में 1 लाख टन के प्याज का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 56,000 टन का बफर स्टॉक बनाया था, लेकिन यह कीमतों को नियंत्रण रखने के लिए पर्याप्त नहीं था, जो अभी भी देश भर के अधिकांश शहरों में 100 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर चल रही हैं। नतीजतन सरकार एमएमटीसी के माध्यम से प्याज का आयात करने के लिए मजबूर हो गयी।
नाफेड बनायेगा बफर स्टॉक
सहकारी नाफेड, जिसने सरकार की ओर से प्याज का बफर स्टॉक बनाया था, अगले साल भी ऐसा करना जारी रखेगा। यह आधिकारिक तौर पर किसानों से सीधे मार्च और जुलाई के बीच रबी (सर्दियों) प्याज की फसल का स्रोत होगा। इस साल देर से आये मॉनसून और बाद में प्रमुख राज्यों, खास कर महाराष्ट्र और कर्नाटक, में बेमौसम बारिश से खरीफ और देर से खरीफ (गर्मी) प्याज उत्पादन में 26 फीसदी की गिरावट आयी, जिससे प्याज के दाम तेजी से बढ़े। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये, जिनमें निर्यात पर प्रतिबंध, व्यापारियों को सब्सिडी दरों पर प्याज की बिक्री के अलावा स्टॉक सीमा शामिल है।
तुर्की ने लगाया प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध
हाल ही में तुर्की ने भी प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। तुर्की दुनिया के प्रमुख प्याज उत्पादकों में से एक है। वहीं नये साल में चीन से प्याज आ सकती है। एमएमटीसी ने 4,000 मीट्रिक टन प्याज चीन से मंगायेगी। इस साल प्याज के दाम 200 रुपये तक पहुँच गये थे।
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