भारतीय प्राइमरी मार्केट में आज काफी हलचल है क्योंकि दो नई कंपनियां अपना आईपीओ (IPO) लेकर आ रही हैं। रियासत लाइफस्टाइल और एविएंस बायोमेडिकल्स के SME आईपीओ आज यानी 18 जून से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गए हैं। दोनों कंपनियां अपने बिजनेस विस्तार और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से फंड जुटाना चाहती हैं। टेक्सटाइल और हेल्थकेयर सेक्टर में ग्रोथ की तलाश कर रहे रिस्क लेने वाले निवेशकों के लिए ये निवेश के अच्छे मौके हो सकते हैं।
रियासत लाइफस्टाइल ने अपने शेयरों के लिए फिक्स्ड प्राइस रखा है, वहीं एविएंस बायोमेडिकल्स की वैल्यूएशन काफी वाजिब नजर आ रही है। बोली लगाने से पहले निवेशकों को मिनिमम लॉट साइज का खास ध्यान रखना चाहिए। हाल के दिनों में लिस्टिंग पर मिले शानदार मुनाफे की वजह से मिड-टियर इश्यू को लेकर बाजार में काफी उत्साह है। हालांकि, ध्यान रहे कि सफल पेमेंट प्रोसेसिंग के लिए शाम 5 बजे की UPI कटऑफ डेडलाइन बेहद जरूरी है।

रियासत लाइफस्टाइल और एविएंस बायोमेडिकल्स आईपीओ की डिटेल्स
रियासत लाइफस्टाइल मुख्य रूप से अपैरल (कपड़ा) सेगमेंट में काम करती है और इसकी कमाई का जरिया काफी स्थिर है। इसके उलट, एविएंस बायोमेडिकल्स मेडिकल कंज्यूमेबल्स के खास मार्केट में सक्रिय है। पिछले कुछ वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड देखें तो दोनों कंपनियों के मार्जिन में सुधार हुआ है। हालांकि इनका स्केल अभी छोटा है, लेकिन कर्ज और इक्विटी का अनुपात (debt-to-equity ratio) फिलहाल कंट्रोल में दिख रहा है। यह मजबूत बुनियाद भारतीय बाजार में इनके लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं को दर्शाती है।
| फीचर | रियासत लाइफस्टाइल | एविएंस बायोमेडिकल्स |
|---|---|---|
| इश्यू का प्रकार | SME IPO | SME IPO |
| इंडस्ट्री फोकस | टेक्सटाइल सेगमेंट | हेल्थकेयर जरूरतें |
| मुख्य जोखिम | कीमतों में उतार-चढ़ाव | सेफ्टी रेगुलेशंस |
रियासत लाइफस्टाइल और एविएंस बायोमेडिकल्स SME IPO में जोखिम
SME शेयरों में निवेश करना काफी जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इनमें लिक्विडिटी कम और उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। ये स्टॉक अक्सर एन्हांस्ड सर्विलांस मेजर (ESM) नियमों के दायरे में आते हैं। ये नियम रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए शेयरों की डेली मूवमेंट को सीमित करते हैं। इस सेगमेंट में बंपर लिस्टिंग गेन की चर्चा तो आम है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं होती। अगर बड़ी कंपनियों से तुलना करें तो इन इश्यू की प्राइसिंग थोड़ी आक्रामक रखी गई है।
SME प्लेटफॉर्म की अस्थिरता को देखते हुए पहली बार बोली लगाने वाले निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के संकेत सकारात्मक दिख रहे हैं, लेकिन ये कोई आधिकारिक इंडिकेटर नहीं हैं। समझदार निवेशक अक्सर संस्थागत निवेशकों का रुझान देखने के लिए दूसरे दिन के सब्सक्रिप्शन डेटा का इंतजार करते हैं। तकनीकी दिक्कतों की वजह से रिजेक्शन से बचने के लिए बैंक डेडलाइन से पहले अपना फंड तैयार रखें। इन उतार-चढ़ाव भरे मौकों पर सोच-समझकर लिया गया फैसला ही फायदेमंद साबित होता है।


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