नयी दिल्ली। अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज एक नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। देश की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज या आरआईएल अपने नये प्रोजेक्ट के तहत 1.3 अरब आबादी वाले भारत में प्रदूषण को लेकर बढ़ रही चिंताओं के बीच देश की सड़कें बनाने में प्लास्टिक का इस्तेमाल करेगी। भारत जहां सालाना लगभग 1.4 करोड़ टन प्लास्टिक का उपयोग होता है, में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए एक संगठित सिस्टम की कमी है, जिसकी वजह से बड़े स्तर पर कूड़े-कचरे का उत्पादन होता है। आरआईएल ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सामने अपनी 'वेस्ट प्लास्टिक-टू-रोड' तकनीक की पेशकश की है, जिसमें सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक का उपयोग होगा। आरआईएल पहले से ही कुछ परियोजनाओं पर काम शुरू कर चुकी है और इसने 50 टन प्लास्टिक कचरे को मिलाकर लगभग 40 किलोमीटर सड़क का निर्माण भी किया है।

क्या कहा रिलायंस ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2022 तक भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत को समाप्त करने को कह रहे हैं। इस बीच आरआईएल के अधिकारियों ने एक कार्यक्रम में कहा है कि भारतीयों को प्लास्टिक से नहीं बल्कि प्रदूषण से लड़ने पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी भारत के राजमार्ग प्राधिकरण और अलग-अलग राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहती है ताकि हजारों किलोमीटर की सड़कों को बनाने के लिए प्लास्टिक-मिश्रण मिक्सचर की आपूर्ति की जा सके।
हल्की प्लास्टिक का होगा इस्तेमाल
कैरी बैग या स्नैक रैपर में इस्तेमाल होने वाली हल्की प्लास्टिक रीसायकल करने लायक नहीं होती। इसका अंत कूड़े के ढेर, सड़क के कोनों या महासागरों में होता है। रिलायंस इसी प्लास्टिक का इस्तेमाल बिटुमेन के साथ मिला कर सड़कें बनाने में करना चाहती है। ये एक ऐसा फॉर्मूला है, जिसे जानकार सस्ता और टिकाऊ मान रहे हैं। रिलायंस के पेट्रोकेमिकल कारोबार के सीओओ विपुल शाह ने कहा यह हमारे पर्यावरण और हमारी सड़कों के लिए एक गैम-चेंजिंग प्रोजेक्ट हो सकता है।
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