नयी दिल्ली। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रेपो रेट में कटौती का फैसला मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान मुख्य तौर पर दो चीजों पर रहेगा। इनमें पहला है यस बैंक और दूसरा कोरोनावायरस तथा इसका इकोनॉमी पर पड़ने वाला प्रभाव। उन्होंने कहा कि मैंने घोषणा की थी कि आरबीआई 6 मार्च को बहुत तेजी से यस बैंक के लिए एक योजना लाएगा। 5 मार्च को यस बैंक पर पाबंदियां लगाई थी, जबकि इसके अगले ही दिन 6 मार्च को ड्राफ्ट स्कीम पेश की गई थी। यस बैंक के लिए अंतिम योजना की अधिसूचना 7 मार्च को सरकार की तरफ से जारी की गयी। आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि यस बैंक ग्राहक 18 मार्च शाम 6 बजे से अपना निकाल सकते हैं। मगर उनके मुताबिक हड़बड़ी में पैसा निकालने की जरूरत नहीं है।

रेपो दर घटाने का था अनुमान
आरबीआई की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा के बाद जानकार अनुमान लगा रहे थे कि रेपो रेट घटाने की घोषणा की जा सकती है। क्योंकि इससे पहले यूएस फेडरल रिजर्व ने अर्थव्यवस्था को लिक्विडिटी प्रदान करने के लिए रविवार को एक महीने में दूसरी बेंचमार्क दर में कटौती कर चुका है। वहीं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ के बैंक केंद्रीय बैंक भी इसी तरह की ब्याज दरों में कटौती कर चुके हैं। इस कटौती के पीछे कोरोनावायरस के कारण बढ़ रही आर्थिक मंदी है। मगर फिलहाल आरबीआई ने ऐसा नहीं किया। हालांकि आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि मैं दरों में कटौती की संभावना को खारिज नहीं कर रहा हूं। साथ ही हम COVID-19 (Coronavirus) के प्रभाव का अनुमान लगा रहे हैं।
आरबीआई गवर्नर की अन्य मुख्य बातें :
- बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का एलटीआरओ (लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन)
- यस बैंक का नया बोर्ड 26 मार्च को मैनेजमेंट संभालना शुरू करेगा
- अगले महीने एमपीसी की बैठक में कोरोना के असर को ध्यान में रखा जाएगा
- कोरोनावायरस के चलते डिजिटल पेमेंट बेहतर ऑप्शन
- 23 मार्च को एक और 6 महीने के अमेरिकी डॉलर / रुपये की बिक्री-खरीद स्वैप का प्रस्ताव
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