नई दिल्ली। घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा ने देश की जीडीपी में 5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है। इकरा का कहना है कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था दबाव में रहेगी। इकरा का कहना है कि जीडीपी में यह गिरावट भारी भरकम आर्थिक पैकेज के बाद भी देखी जाएगी। इकरा का कहना है कि इसके दो मुख्य कारण हैं, पहला है कि लॉकडाउन और दूसरा उसके बाद लेबर की कमी। इससे पहले भी इकरा ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 1 से 2 फीसदी तक घटने का अनुमान जताया था।

पहली तिमाही सबसे खराब रहेगी
इकारा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने एक रिपोर्ट में कहा कि हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में ज्यादा कमी दर्ज होगी। इसके लिए लॉकडाउन को बढ़ाना, सप्लाई चेन ऑपरेशन में देरी की आशंका और अपने घरों को लौटने वाले मजदूरों के लौटने को जिम्मेदार बताया गया।
चौथी तिमाही में 5.5 फीसदी गिरावट का अनुमान
इकरा ने 7 अप्रैल को वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही में 4.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया था। एजेंसी ने धीरे-धीरे रिकवरी के कारण वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी ग्रोथ 2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। हालांकि अब इकरा ने कोरोना महामारी के चलते अपने पहले के अनुमान में तेजी से कटौती की है।
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा ज्यादा खराब असर
इकरा के अनसार एविएशन, होटल्स, रेस्टोरेंट एंड टूरिज्म, ऑटो डीलरशिप्स, सेरेमिक टाइल्स, जेम्स एंड ज्वैलरीए रिटेलए शिपिंगए पोर्ट्स एंड पोर्ट सर्विसेज, सीफूड एंड पोल्ट्री और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव रहेगा।
ये है 21 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज
कोरोना से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 21 लाख करोड़ रुपये का आत्मनिर्मभर भारत प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान किया है। इसमें गरीब मजदूरों को नकद कैश और अनाज, एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी, एनबीएफसी-एमएफआई को क्रेडिट गारंटी, मनरेगा मजदूरों के लिए अतिरिक्त आवंटन समेत किसानों के लिए कई उपाय किए गए हैं।
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