नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना महामारी फैली हुई है। इसकी शुरुआत चीन से हुई, लेकिन अब चीन को छोड़ कर बाकी दुनिया परेशान है। इस बीमारी का इलाज न होने के चलते दुनिया के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन किया गया है। इससे इन देशों की अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देश चीन पर आरोप लगा चुके हैं कि कोरोना वायरस चीन की देन है। हालांकि चीन इससे इनकार करता है। वहीं दुसरी तरफ चीन दुनिया की बिगड़ी अर्थव्यवस्था का अनैतिक तरीके से फायदा उठाना चाह रहा है। दुनिया के हर देश के शेयर बाजार में गिरावट के चलते कंपनियों की वैल्यूएशन कम हो गईं हैं। इसका चीन फायदा उठा कर उनमें निवेश बढ़ाना चाह रहा है। लेकिन भारत ने अपनी एफडीआई नीति कुछ ही घंटे में बदल कर चीन की चाल पलट कर रख दी। चीन इससे काफी तिलमिला रहा है। भारत सहित अन्य जगहों पर इसको लेकर आलोचना भी कर चुका है, लेकिन मोदी सरकार सहित दुनियाभर में उसकी कोई नहीं सुन रहा है। ऐसा नहीं है चीन ने यही अकेला गलत काम किया है। उसने इस मौके का गलत तरीके से फायदा उठाने के लिए 5 चालें चली थीं, जिनको भारत ने देखते देखते पलट दिया।
आइये जानते हैं कि चीन की क्या थीं वह 5 चालें और कैसे भारत ने पलटी बाजी।
कुछ घंटे में ही पलट दी एफडीआई नीति
एचडीएएफसी ने शेयर बाजार रेग्युलेटरी फाइलिंग में बतया था कि चीन के रिजर्व बैंक की उसमें हिस्सेदारी बढ़कर 1 फीसदी से ज्यादा हो गई है। जैसे ही यह जानकारी सामने आई भारत की मोदी सरकार हरकत में आ गई। भारत ने चीन की चाल समय से भांप ली और कुछ ही घंटे में एफडीआई नीत बदल दी। अब भारत से जिन देशों की सीमाएं लगती हैं, उन देशों से भारत में निवेश आने के पहले उसे भारत सरकार की इजाजत लेनी होगी। पहले यह ऑटोमेटिड रूट से होता था। अभी भी भारत की सीमा से सटे देशों के अलावा यह निवेश ऑटोमेटिड रूट से आ सकता है। लेकिन चीन पाकिस्तान सहित कुछ देशों से ऐसा नहीं हो सकता है। यही नहीं मोदी सरकार ने इस नीति में एक औरे बदलाव चीन की चालाकी को देखते हुए किया है। इसके अनुसार दुनिया के किसी भी हिस्से अगर निवेश आता है, और उसका चीन से कनेक्शन है, तो ऐसे निवेश से पहले भारत सरकार की इजाजत जरूरी होगी। भारत के इस तेज और बोल्ड फैसले से फिलहाल चीन चित है, और दुनियाभर में शिकायत कर रहा है।
चीन में फंसे भारतीय छात्रों को वापस भेजने पर आनाकानी
चीन के वुहान में जब कोरोना वायरस फैला था, भारत सरकार अपने छात्रों को वहां से निकालना चाहती थी। लेकिन अपनी चीन ने अन्य देशों को तो ऐसा करने की आसानी से इजाजत दे दी, लेकिन भारत को लेकर आनाकानी करने लगा था। ऐसे में भारत से चीन ने साफ साफ बात की और पक्षपात करने के परिणाम से अवगत कराया। इसके अगले ही दिन भारत को अपने छात्रों को लाने की इजाजत देनी पड़ी थी। चीन नहीं चाहता था कि भारत के छात्र वहां से जाएं और की अव्यवस्था की पोल खुले। लेकिन भारत की सख्ती की आगे उसकी यह चाल बेकार चली गई थी।
घटिया मास्क और पीपीई किट की आपूर्ति
चीन ने अपनी स्थिति ग्लोबल निमार्ण केन्द्र के रूप में होने का दावा किया था। इसी के चलते दुनियाभर से उसे कोरोना के खिलाफ लड़ाई के जरूरी टेस्टिंग किट और दवाओं के लिए आर्डर मिले। भारत ने भी बड़ा पैमाने पर चीन को आर्डर दिए थे। लेकिन शुरूआती आपूर्ति में चीन से आए टेस्टिंग किट भारत में फेल हो गए। भारत ने यह मुद्दा चीन के सामने उठाया, लेकिन चीन ने भारत के डॉक्टरों की काबिलियत पर सवाल उठा दिए। चीन ने कहा कि भारत के डॉक्टर टेस्टिंग किट का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इससे नाराज भारत ने कुछ ही घंटे के अंदर चीन के टेस्टिंग किट के इस्तेमाल न करने का फैसला चीन को सुना दिया। चीन भारत के इस बोल्ड कदम से फिर बिलबिला गया। बाद में उसने भारत की मेडिकल आपूर्ति रोकने की धमकी भी दी, लेकिन भारत की सख्ती देख अब चीन इस मामले पर गौर करने और भारत की चिंता दूर करने की बात कह रहा है। चीन को इस बात का घंमड था कि कोरोना महामारी के दौर में कोई भी देश इस वक्त चीन से दवा और टेस्टिंग किट को लेकर झगड़ा नहीं कर सकता है। लेकिन भारत की सरकार ने कुछ ही घंटे के अंदर चीन का यह भ्रम दूर कर दिया। इस बीच भारत ने कोरिया सहित अन्य देशों से टेस्टिंग किट आपूर्ति की व्यवस्था कर ली है। इस बीच मई की शुरुआत से ही भारत में भी इनका बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो जाएगा। इसके बाद भारत की विदेश पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। लेकिन चीन की यह अकड़ भारत ने एक झटके में दूर कर दी।
चीन से आयात पर निर्भरता का मोदी ने दिया जवाब
चीन को इस बात का घंमड है कि उसके बिना के ज्यादातर देशों का काम नहीं चलेगा। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान ही मोदी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब विदेश पर निर्भरता खत्म करेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि चीन सहित किसी भी देश से आयात उसी स्तर तक किया जाएगा, जहां पर यह भारत की स्वतंत्रता के लिए खतरा न हो। इसके लिए पीएम नरेन्द्र मोदी ने सभी मंत्रालयों से टॉप 10 लिस्ट बनाने का आदेश दिया है। जैसे ही यह लिस्ट तैयार होती है, सरकार हर सेक्टर के हिसाब से नीतिया बना कर निर्माण के लिए भारत को आदर्श देश साबित करने की कोशिश करेगा। उम्मीद है कि मोदी सरकार के इस फैसले से लॉकडाउन के दौरान अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई बहुत ही जल्द हो जाए।
चीन से कंपनियों को बाहर आने का चला दांव
चीन ने दुनियाभर की कंपनियों को अपने यहां आकर्षित कर रखा था। लेकिन इस संक्रमण के कॉल में चीन ने एक जिम्मेदार देश के रूप में अपने का पेश नहीं किया। इसी का परिणाम है कि अब चीन में काम करने वाली कंपनियां वहां से निकलना चाहती हैं। हालांकि चीन इन कंपनियों को अपने यहां बने रहने के लिए लालच के साथ इशारों में नुकसान की भी बात की है, लेकिन भारत, जापान और अमेरिका ने चीन की यह चाल पलट दी है। जापान ने बाकायदा 2.2 बिलियन डॉलर का एक पैकेज घोषित कर दिया है। इस पैकेज के तहत उन कंपनियों को मदद की जाएगी जो चीन से बाहर आना चाहेंगी। यह कंपनियां अगर जापान वापस आना चाहें तो ज्यादा मदद मिलेगी, लेकिन अगर जापान की जगह अन्य देश में जाना चाहें तो भी उनकी आर्थिक मदद की जाएगी। दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपनी कंपनियों के भारत शिफ्ट होने का संकेत दे दिया है। इस बीच भारत ने अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए चीन में काम कर रही करीब 1000 कंपनियों की लिस्ट तैयार कर ली है। अब इन कंपनियों से वार्ता शुरू की जा रही है। इनमें से 300 कंपनियों से वार्ता शुरू भी हो गई। भारत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि पिछले दिनों पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों से वार्ता के दौरान अपनी कारोबारी नीतियों में लचीलापन लाने का सुझाव दिया था। हालांकि उन्होंने चीन को लेकर कोई बयान नहीं दिया था, लेकिन इसका मतलब चीन से आने वाली कंपनियों के लिए आदर्श स्थिति तैयार करना ही थी। इस प्रकार भारत चीन की 20 साल की ताकत को एक झटके में चुनौती देता नजर आ रहा है।
More From GoodReturns

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: 1 सितंबर को जानें अपने शहर में 22K और 24K के ताजा रेट

FD की नई दरें: इन 4 बैंकों में सीनियर सिटीजन्स को मिल रहा 8.30% तक ब्याज, जानें निवेश का सही तरीका

आज 31 अगस्त को सोने के दाम स्थिर, खरीदारी से पहले जानें 22 और 24 कैरेट के ताजा रेट

LIC की नई पॉलिसी लॉन्च: 'बीमा प्लेटिनम' और 'जीवन रक्षा' में से कौन सी है आपके लिए बेस्ट?

EPFO Enrollment Campaign 2026: पीएफ से छूटे कर्मचारियों के लिए आखिरी मौका, 31 अक्टूबर तक करें आवेदन

पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: आज आपके शहर में क्या है कीमत? जानें पूरा गणित

Gold Price 2 सितंबर को सोने-चांदी के भाव में स्थिरता, क्या आज खरीदारी करना है फायदे का सौदा? जानें ताजा रेट

3 सितंबर को सोने के दाम स्थिर: क्या आज खरीदारी करना सही फैसला है? जानें ताजा रेट

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: 4 सितंबर को आपके शहर में बैंक बंद या खुले? चेक करें पूरी लिस्ट

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार, NSE-BSE की छुट्टी से ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?

GST कलेक्शन का धमाका: ₹2 लाख करोड़ के करीब पहुंचा आंकड़ा, इन सेक्टर्स में मचेगी हलचल!



Click it and Unblock the Notifications
