रेल मंत्रालय की योजना से कई अहम रूटों पर जल्द ही 150 नई निजी ट्रेन चलने वाली हैं। इन सभी ट्रेनों को विभिन्न व्यस्त मार्गों पर चलाया जाएगा।
नई दिल्ली: रेल मंत्रालय की योजना से कई अहम रूटों पर जल्द ही 150 नई निजी ट्रेन चलने वाली हैं। इन सभी ट्रेनों को विभिन्न व्यस्त मार्गों पर चलाया जाएगा। सरकार रेलवे के निजीकरण की योजना पर तेजी से कदम बढ़ाने जा रही है। 8-9 दिसंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अधिकारियों को 150 नए ट्रेन रूट की पहचान करने और उससे संबंधित प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। जिसमें दुरंतो, तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेन को निजी ऑपरेटर के हाथ में सौंपा जा सकता है। 1 फरवरी से महंगा होगा ट्रेन का सफर, जानिए कितना बढ़ेगा किराया ये भी पढ़ें
यात्रियों को मिलेगी स्पेशल सुविधा
रेल मंत्री की बैठक से मिली जानकारी के मुताबिक इनमें से 30 निजी ट्रेन मुंबई से चलाई जा सकती है। यह सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे से संबंधित हो सकती है। इन रूट में मुंबई-अहमदाबाद भी शामिल है। निजी ऑपरेटर के हाथ में आने वाली यह ट्रेन दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस की तरह हो सकती है। वहीं मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में शामिल अधिकारियों ने नए रूट पर चर्चा की। बैठक में ट्रेन के किराए और यात्रियों को दिए जाने वाले खाने आदि के बारे में भी चर्चा की गयी। नयी पहल में यात्रियों के घर से सामान उठाने जैसी सेवा भी शामिल हो सकती है। उम्मीद की जा रही है कि नए रूट पर चलने वाली निजी ट्रेन यात्रियों की सुविधा और समय का ध्यान रखेगी।
150 ट्रेन के लिए लागाई जाएगी बोली
वही रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव का कहना है कि हम अगले महीने 150 ट्रेन के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। देश में यह पहली बार हो रहा है और इस वजह से बोली की प्रक्रिया में समय लग सकता ह। पूरी दुनिया में इस तरह का कामकाज होता है। बोली लगाने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में बोली लगाने की योग्यता देखी जाएगी। जबकि दूसरे चरण में आरएफपी देखा जायेगा। हांलाकि अधिकारियों ने कहा कि मुंबई से चलने वाली निजी ट्रेन मुंबई सेंट्रल, कुर्ला, बांद्रा और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से चलाई जायेंगी। निजी ऑपरेटर मुनाफे और यात्रियों की संख्या के हिसाब से ट्रेन का रूट चुन सकते हैं।
यात्रियों को बेहतर सेवा और फायदा देना मकसद: गोयल
मालूम हो कि इससे पहले रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि रेलवे को चलाने के लिए अगले 12 साल में अनुमानित तौर पर 50 लाख करोड़ रुपये की पूंजी सरकार अकेले नहीं जुटा सकती, इसलिए इस तरह के कदम उठाए गए हैं। वहीं ऊपरी सदन में गोयल ने कहा, "हमारा मकसद यात्रियों को बेहतर सेवा और फायदा देना है, न कि रेलवे का निजीकरण करना। इस तरह भारतीय रेलवे भारत और देशवासियों की संपत्ति है और आगे भी रहेगी।
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