Punjab Govt: पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 50 फीसदी कमी लाने का दावा

Punjab Govt: मुख्य मंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 50 फीसदी से ज्यादा की कमी लाने का टारगेट रखा है। प्रदेश सरकार ने यह दावा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को सौंपे गए एक्शन प्लान में किया है। पंजाब और हरियाणा सहित 6 प्रदेशों में धान की फसल के बाद उसके अवशेष को खेत में ही जलाने का चलन है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेष तौर पर पंजाब और हरियाणा के खेतों में बड़े स्तर पर जलाई जाने वाली पराली के चलते ठंड के मौसम में एनसीआर सहित करीब पूरे उत्तर भारत की हवा दमघोंटू हो जाती है।

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इसी वजह से पहले से ही इस पराली जलाने से रोकने के लिए प्रयत्न शुरू किए जाते हैं।अब तक इस क्रम में सीएक्यूएम पंजाब के अधिकारियों के साथ 4 बार बैठक कर चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पंजाब की ओर से बैठक में पराली को जलाने से रोकने के लिए अपना एक्शन प्लान दे दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस साल पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं को 50 फीसदी से भी नीचे लाया जाएगा।

वहीं, मलेरकोटला, पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, एसएएस नगर, एसबीएस नगर में पराली जलाने के मामले समाप्त करने का प्रयत्न किया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार, पंजाब में इस सीजन में कुल 2 करोड़ टन पराली निकलने का अनुमान है।

33 मीट्रिक टन बासमती धान की पराली भी इसमें शामिल है। करीब डेढ़ करोड़ टन पराली के प्रबंधन के लिए कारगर एक्शन प्लान तैयार किया गया है। पराली के इसमें विभिन्न प्रयोग शामिल है।

फिलहाल पंजाब राज्य में पराली प्रबंधन के लिए करीब 117662 सीआरएम मशीन हैं, जबकि और 23,000 मशीन लाई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल पंजाब के केवल 5 जिलों में ही 44 फीसदी पराली जलाई गई थी।

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