नयी दिल्ली। भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस या यूपीआई काफी समय से वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। अब गूगल ने अपने प्रस्तावित 'फेडनाउ' के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व को भारत के यूपीआई का हवाला दिया है। फेडनाउ एक नयी इंटरबैंक ग्रॉस सेटलमेंट सर्विस है। गूगल ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व बोर्ड को बकायदा भारतीय यूपीआई सिस्टम की पूरी जानकारी दी है। गूगल ने फेडरल रिजर्व को लिखे एक पत्र में कहा है कि भारत के चार सबसे बड़े बैंकों के सहयोग से गूगल का यूपीआई के साथ गूगल पे का इंटीग्रेशन सरकार और वित्तीय सेवा भागीदारों के साथ सहयोग के जरिये इनोवेशन के लिए गूगल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गूगल की सलाह है कि भारतीय यूपीआई जैसा सिस्टम अमेरिका में भी शुरू किया जाये। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल की तरफ से फेडरल रिजर्व को 7 नवंबर को पत्र भेजा गया था, जिसे शनिवार को सार्वजनिक किया गया। भारतीय मूल के सुंदर पिचाई गूगल के सीईओ हैं।

ऐसे सफल हुआ यूपीआई
गूगल के अमेरिका और कनाडा के लिए सरकारी मामले और सार्वजनिक नीति के उपाध्यक्ष मार्क इसकोविट्ज ने पत्र में कहा कि यूपीआई को योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था और इसके डिजाइन के महत्वपूर्ण पहलुओं से इसकी सफलता की अहम वजह रही। मार्क के मुताबिक भारत में अपनी गूगल पे ऐप पेश करने के दौरान गूगल ने आरबीआई के पेमेंट रेगुलटर नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया या एनपीसीआई के साथ मिल कर काफी बारीकी के साथ काम किया। पत्र में कहा गया है कि भारत में बैंक, कंज्यूमर वगैरह के लिए बहुत शानदार नतीजे सामने आये हैं।
2014 में आया था यूपीआई
यूपीआई अप्रैल 2014 में पेश किया गया था, जिसके जरिये हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे मोबाइल डिवाइस के माध्यम से तत्काल पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा मिलती है। इस साल नवंबर तक 143 बैंक यूपीआई प्लेटफॉर्म पर थे। वहीं इस पर बढ़ कर 121.87 करोड़ रुपये की हो गई। वहीं गूगलपे के उपयोगकर्ताओं की संख्या पिछले साल सितबंर में 2.2 करोड़ थी, जो इस साल सितंबर तक 6.7 करोड़ हो गयी।
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