नयी दिल्ली। पिछले करीब 4-5 महीनों में प्याज पर देश भर में बहुत हाहाकार हुआ। कम पैदावार के चलते मंडियों में आपूर्ति कम हुई जिससे प्याज की कीमतें 200 रुपये के ऊपर पहुँच गयी। आनन-फानन में केंद्र सरकार ने विदेशों से प्याज का आयात करना शुरू कर दिया। सरकार का उद्देश्य प्याज की आपुर्ति बढ़ा कर कीमतें कम करना था। विदेशों से आयी प्याज और धीरे-धीरे नयी फसल से आम जनता को बढ़ी हुई कीमतों से काफी हद तक राहत मिली, मगर सरकार की दुश्वारी खत्म नहीं हुई। इसका कारण है राज्यों द्वारा प्याज की खरीदारी न करना। ऊपर से अलग जायके की वजह से भारतीय विदेशी प्याज नहीं पसंद कर रहे। इसका नतीजा अब यह हुआ है कि 7000 टन प्याज पड़े-पड़े सड़ चुका है। महाराष्ट्र, जहां सबसे अधिक प्याज का उत्पादन होता है, की मंडियों में प्याज की कीमतें घटी हैं। इससे मुंबई बंदरगाह पर विदेशों से आया 7000 टन प्याज सड़ गया।

अधिक है आयातित प्याज की कीमत
दरअसल आयातक अधिक कीमतों की वजह विदेशों से आयी प्याज लेने में सुस्ती दिखा रहे हैं। आयातित प्याज का भाव 45 रुपये प्रति किलो है, मगर थोक मंडियों में प्याज का भाव काफी नीचे आ गया है। कल यानी मंगलवार तक पिछले एक हफ्ते में कीमतें 40 फीसदी तक घट गयी हैं। इसी की नतीजा है कि विदेशी प्याज सड़ना शुरू हो चुका है। देश में विदेशी प्याज न पसंद किये जाने के बाद भारत ने इसे जल्दी से जल्दी दूसरे देशों को बेचने का प्रयास किया। अमेरिका के इंकार के बाद भारत मालदीव, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों को बिना किसी नुकसान या फायदे ये प्याज बेचने की कोशिश कर रहा है।
सरकार बनायेगी बड़ा बफर स्टॉक
इस बार के जैसा प्याज संकट को दोबारा आने से रोकने के लिए, केंद्र सरकार ने 2020 में 1 लाख टन के प्याज का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया है। सरकार ने चालू वर्ष के लिए 56,000 टन का बफर स्टॉक बनाया था, लेकिन यह कीमतों को नियंत्रण रखने के लिए पर्याप्त नहीं था। नतीजतन सरकार को एमएमटीसी के माध्यम से प्याज का आयात करना पड़ा। कीमतें कम हो गयीं मगर देश में पसंद न किये जाने के कारण प्याज सड़ रहा है।
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