नयी दिल्ली। प्याज वो सब्जी है जिस पर भारत में सबसे अधिक हाहाकार मचता है। लगभग हर साल 2-3 महीने ऐसे होते हैं जिनमें प्याज के भाव आसमान छूने लगते हैं। इससे आम जनता से लेकर सरकार तक परेशान रहती है। मगर प्याज किसानों को भी परेशान करता है। अगर मौजूदा रेट देखें तो दिल्ली में प्याज 20 रु प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। मगर इसी प्याज ने किसानों का बुरा हाल कर दिया है। भारत के कुछ हिस्सों में किसानों को पिछले कुछ दिनों में 1 रु प्रति किलो से भी कम भाव पर बेचनी पड़ी है। जी हां तेलंगाना की सदाशिवपेट मंडी में किसानों को महज 59 पैसे प्रति किलो के भाव पर प्याज बेचना पड़ा। वहीं देश की कई अन्य मंडियों में भी पिछले चंद दिनों में किसानों को 3.5 रुपये प्रति किलो तक के रेट प्याज बेचना पड़ा। ऐसे में जानकार सवाल उठाते हैं कि केंद्र सरकार भला कैसे किसानों इनकम डबल कर पाएगी।
लागत निकालना हो रहा मुश्किल
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़े सरकारी वेबसाइटों पर मौजूद है। बता दें कि प्याज किसानों की हालत ऐसी हो गई है कि उनके लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रही है। दरअसल फसल उगाने से मंडी पहुंचाने तक में किसानों को प्रति किलो 8-9 रु की लागत उठानी पड़ती है, मगर जिस रेट पर इस समय प्याज मंडियों में खरीदा-बेचा जा रहा उससे किसानों के लिए लागत निकालना नामुमकिन है। किसान सरकार की तरफ से भी नाउम्मीद हैं। वहीं जानकार बताते हैं कि प्याज को लेकर एक बड़ी लॉबी है जिसकी वजह से हर साल किसान नुकसान उठाते हैं।
इन राज्यों में हालात बुरे
जिन राज्यों में प्याज किसानों के हालात खराब हैं उनमें महाराष्ट्र और तेलंगाना शामिल हैं। जहां तेलंगाना की मंडियों में प्याज 59 पैसे प्रति किलो में बिका वहीं महाराष्ट्र की अलग अलग मंडियों में किसानों ने प्याज 1 से 3.51 रु प्रति किलो तक के रेट पर बेचा। जानकार साफ कहते हैं कि किसानों की इस हालत के जिम्मेदार बिचौलिये हैं जो सप्लाई चेन में मौजूद गड़बड़ियों का फायदा उठाते हैं। क्योंकि प्याज जब 120 रु प्रति किलो बिका तब भी किसान खास फायदे में नहीं रहे और 20 रु प्रति किलो पर भी उन्हें लाभ नहीं मिल रहा।
कितना है प्याज का प्रोडक्शन
जहां तक भारत में प्याज के उत्पादन का सवाल है तो देश में 2.25-2.50 करोड़ मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन होता है, जबकि देश में न्यूनतम 1.5 करोड़ मीट्रिक टन प्याज बिकती है। एक अनुमान के मुताबिक स्टोरेज में 10-20 लाख मीट्रिक टन प्याज खराब भी होती है। इसके अलावा 35 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात कर दिया जाता है। जानकार मानते हैं कि प्याज किसानों और इसकी कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार को खास रणनीति बनानी होगी।
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