NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) ने बुधवार रात मार्केट रेगुलेटर के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किया। यह भारत का सबसे बड़ा इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) हो सकता है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) के पास जमा किए गए डॉक्यूमेंट से पता चलता है कि NSE IPO पूरी तरह से मौजूदा इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स से 149 मिलियन तक इक्विटी शेयरों की बिक्री का ऑफर है। इसका मतलब है कि NSE की पेड-अप कैपिटल का कुल 6% नए निवेशकों को ऑफर किया जा रहा है। इस ट्रांजैक्शन के तहत कोई नई इक्विटी कैपिटल जारी नहीं की जाएगी।

डॉक्यूमेंट के अनुसार, 1 रुपये की फेस वैल्यू वाले इस IPO में SBI और अन्य प्रमुख मौजूदा इन्वेस्टर्स की ओर से 14.89 करोड़ तक के शेयरों की बिक्री (ऑफर-फॉर-सेल) शामिल है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के मुताबिक, इश्यू का साइज लगभग 3 बिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।
यह फाइलिंग उस लिस्टिंग प्रोसेस का आखिरी चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2016 में हुई थी, जब NSE ने 10,000 करोड़ रुपये के इश्यू के लिए अपना पहला DRHP फाइल किया था, लेकिन बाद में को-लोकेशन विवाद के कारण यह प्रोसेस रुक गया था।
NSE का IPO पूरी तरह OFS
यह IPO पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (मौजूदा शेयरों की बिक्री) के तौर पर लाया जा रहा है, जिसका मतलब है कि एक्सचेंज खुद कोई नई पूंजी नहीं जुटाएगा। इसके बजाय, इससे मिलने वाली पूरी रकम उन मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी जो एक्सचेंज में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचना चाहते हैं।
यह फाइलिंग सेबी के इस साल जनवरी में NSE को औपचारिक 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी करने के कुछ महीनों बाद आई है। इस NOC ने उस आखिरी बड़ी रेगुलेटरी रुकावट को दूर कर दिया, जिसने 2016 से एक्सचेंज की लिस्टिंग योजनाओं को रोक रखा था। NSE ने मार्च में इस ऑफरिंग को मैनेज करने के लिए 20 मर्चेंट बैंकर नियुक्त किए थे और तब से वह अपने सालाना फाइनेंशियल नतीजों की घोषणा के बाद ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस को पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।


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