नयी दिल्ली। 2019 में इकोनॉमिक साइंसेज के नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी ने भारत सरकार से आगामी बजट में मांग को बढ़ाने के लिए अधिक कदम उठाने का सुझाव दिया है। इसके लिए उन्होंने कहा है कि कॉर्पोरेट टैक्स में और कटौती किये जाने के बजाय गरीब लोगों के हाथ में और अधिक पैसा दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि ऋण माफी संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है, केवल लोन लेने वालों के बजाय प्रभावित लोगों के बड़े समूह पर ध्यान केंद्रित करने के लिए राहत उपाय करने चाहिए। बनर्जी का मानना है कि कॉर्पोरेट के पास पहले से ही काफी कैश है और वे मांग में कमी की वजह से नया निवेश नहीं कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे में सरकार को मांग संबंधित मामलों को पहले हल करना चाहिए। उन्होंने यह बातें शुक्रवार को हुए एक कार्यक्रम में कहीं, जिसमें उनकी पत्नी और अर्थशास्त्र 2019 के लिए नोबेल पुरस्कार की सह-विजेता एस्तेर डुफ्लो उनके साथ थीं।

2020-21 के बजट पर क्या कहा
आगामी बजट के लिए उनकी अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर भारतीय मूल के अमेरिकी अभिजीत बनर्जी ने कहा कि 'मैं कहूंगा कि सबसे पहले कॉर्पोरेट टैक्स में और कटौती न हो, कॉर्पोरेट सेक्टर के पास काफी कैश है। वे निवेश क्यों नहीं कर रहे हैं? क्योंकि मांग संबंधी समस्याओं के कई संकेत यहां हैं। यदि आप कॉर्पोरेट सेक्टर के बहुत से लोगों से बात करते हैं, तो वे कहते हैं कि अभी उनके पास बेचने के लिए कोई बाजार नहीं है। मुझे लगता है कि आपको डिमांड साइड को चलाने की जरूरत है। उसके लिए, आपको उन लोगों के हाथों में पैसे देने की आवश्यकता है जो इसे अभी खर्च करेंगे, जिन लोगों को धन की आवश्यकता है। पैसे गरीब लोगों के हाथ में दिये जायें।'
'कम मानसून ने किया लोगों को प्रभावित'
बनर्जी ने आगे कहा कि मानसून में कमी के चलते बहुत लोग प्रभावित हुए। ऐसे में अधिक कुशल मशीनरी पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है ताकि केवल लोन लेने वालों के बजाय सभी लोगों (किसानों) को मुआवजा दिया जा सके। बनर्जी के मुताबिक हमारे पास संकट में लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए वास्तव में एक अविकसित मशीनरी है। इसके बजाय हम लोन माफ करने जैसे कदम उठाते हैं जो अनुचित और वास्तव में अक्षम हैं।
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