वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यस बैंक के मामले में शुक्रवार शाम प्रेस कांफ्रेंस की हैं।
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यस बैंक के मामले में शुक्रवार शाम प्रेस कांफ्रेंस की हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बैंक के संकट पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वित्तमंत्रालय और रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं। यस बैंक क्राइसिस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संकट को दूर करने के बारे में क्या कदम उठाए जा रहे हैं उसके बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 2017 से ही रिजर्व बैंक की इसपर नजर है। 30 दिनों के भीतर यस बैंक का री-स्ट्रक्चर किया जाएगा। री-स्ट्रक्चरिंग को लेकर रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर पूरी जानकारी दी गई है।Yes Bank : आती है सैलरी या जाती है किस्त, तो जाने क्या करें ये भी पढ़ें

- रिजर्व बैंक ने कहा कि यस बैंक की पूंजी 5,000 करोड़ रुपये पर। स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टर्स बैंक 49 प्रतिशत की इक्विटी लगाएंगे।
- रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि स्ट्रैटिजिक इन्वेस्टर्स बैंक तीन साल से पहले यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी को 26 प्रतिशत से नीचे नहीं ला सकेंगे।
- यस बैंक ने अनिल अंबानी, एसेल ग्रुप, डीएचएफएल, वोडाफोन जैसी कंपनियों को लोन दिया जो डिफॉल्ट हुए हैं।
- ये सभी मामले 2014 से पहले के हैं जिस समय यूपीए सत्ता में थी।
- स्टेट बैंक ने यस बैंक ने निवेश का इंट्रेस्ट दिखाया है।
- 30 दिनों के भीतर यस बैंक का री-स्ट्रक्चर किया जाएगा। यह स्कीम रिजर्व बैंक लेकर आई है।
- बैंक की तरफ से निवेश लाने के लिए तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन कुछ भी नहीं हो पाया।
- रिजर्व बैंक 2017 से इस बैंक के कामकाज पर गहरी नजर बनाकर रखा है।
- बता दें कि 2004 में यस बैंक की स्थापना की गई थी। यस बैंक ने गलत लोगों को कर्ज दिया। सितंबर 2018 में रिजर्व बैंक ने इसके बोर्ड को बदलने का फैसला किया।
- बैंक ने लोन बांटने में लापरवाही बरती, जिसके कारण आज बैड लोन के नीचे बैंक दब गया है।
- सितंबर 2018 में बैंक के नए सीईओ को नियुक्त किया गया।
- यस बैंक के चेयरमैन ने भ्रष्टाचार भी किया और वे सीबीआई जांच के घेरे में भी आए थे।
- मार्च 2019 में नए सीईओ को नियुक्त किया गया है।
जानिए क्या है संकट की वजह?
निर्मला सीतारमण ने बताया कि यस बैंक द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। बैंक ने जोखिम भरे क्रेडिट निर्णय लिए थे। यस बैंक ने अनिल अंबानी, एसेल ग्रुप, डीएचएफएल, वोडाफोन जैसी कंपनियों को लोन दिया जो डिफॉल्ट हुए हैं। ये सभी मामले 2014 से पहले यानी यूपीए शासनकाल के हैं।
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