नयी दिल्ली। दुनिया में अमीरों की पूँजी को लेकर एक नयी रिपोर्ट सामने आयी है। इसमें उनकी बेशुमार दौलत पर कई खास आंकड़े और जानकारियां पेश की गयी हैं। इस रिपोर्ट में दुनिया के बड़े अरबपतियों की दौलत की सबसे अधिक गरीबों की पूँजी से तुलना की गयी है। इस रिपोर्ट को तैयार किया है कि Oxfam International ने, जो 90 से अधिक देशों में भागीदारों के साथ काम करने वाले 20 गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ का समूह है, जिसका उद्देश्य उस अन्याय को खत्म करना है जो गरीबी का कारण है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 22 सबसे अमीर पुरुषों के पास पूरे अफ्रीका की तमाम महिलाओं से अधिक धन है। वहीं दुनिया में अरबपतियों की संख्या पिछले एक दशक में दोगुनी हो गयी है। इनके पास 60 फीसदी वैश्विक आबादी से अधिक पूँजी है।
गरीब महिलाएँ और लड़कियां सबसे पीछे
रिपोर्ट बताती है कि गरीब महिलाएँ और लड़कियां सबसे निचले दर्जे पर हैं, जो बिना वेतन के हर दिन 12.5 अरब घंटे काम करती हैं। इनके काम की अनुमानित राशि करीब 10.8 लाख करोड़ डॉलर आंकी गयी है। Oxfam के भारत प्रमुख अमिताभ बहर ने कहा कि हमारी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्थाएँ आम पुरुषों और महिलाओं की कीमत पर अरबपतियों और बड़े कारोबारियों की जेबें भर रही हैं। उन्होंने काह कि कोई आश्चर्य नहीं कि लोग सवाल करना शुरू कर रहे हैं कि अरबपतियों का अस्तित्व भी होना चाहिए भी या नहीं?
जानबूझकर असमानता फैलाने वाली नीतियां
बहर के मुताबिक जानबूझकर असमानता फैलाने वाली नीतियों पर ध्यान दिये बिना अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम नहीं किया जा सकता। यह बात उन्होंने दावोस में वार्षिक World Economic Forum से पहले कही जहां वह Oxfam का प्रतिनिधित्व करेंगे। वैश्विक असमानता पर Oxfam की वार्षिक रिपोर्ट इस कार्यक्रम से पहले स्विस अल्पाइन रिसॉर्ट में जारी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि दुनिया के सिर्फ एक फीसदी लोग अगले 10 साल तक 0.5 फीसदी अतिरिक्त टैक्स दें तो यह बुजुर्गों और बच्चों की देखभाल, शिक्षा और स्वास्थ्य में 11.7 करोड़ नए रोजगार सृजित करने के लिए जरूरी निवेश के बराबर होगा।
2,153 अरबपतियों के पास 4.6 अरब गरीबों से अधिक संपत्ति
रिपोर्ट बताती है कि 2,153 अरबपतियों के पास अब इस पूरे ग्रह के 4.6 अरब गरीब लोगों की तुलना में अधिक संपत्ति है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं और लड़कियों पर विशेष रूप से बोझ डाला जाता है क्योंकि वे सबसे अधिक देखभाल करती हैं जिससे हमारी अर्थव्यवस्थाएँ, व्यवसायों और समाजों के पहिये चालू रहते हैं। दुनिया भर में केवल छह फीसदी पुरुषों की तुलना में 42 फीसदी महिलाएं नौकरी नहीं कर सकतीं क्योंकि उन पर देखभाल की जिम्मेदारी होती है। आपको बता दें कि Oxfam के आंकड़े फोर्ब्स मैगजीन और स्विस बैंक क्रेडिट सुइस के आंकड़ों पर आधारित हैं, लेकिन कुछ अर्थशास्त्री इन पर भरोसा नहीं करते।
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