नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने एक और कारनामा अपने नाम कर लिया है। टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर ने अपना खुद का 5जी और दूसरी तकनीक डेवलप की हैं। कंपनी ने यह कदम अपनी लागत घटाने और विदेशी वेंडरो पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए उठाया है। मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडरी रिलायंस जियो ने नोकिया और ओरेकल की 4जी वॉयस तकनीक को अपनी तकनीक से बदल दिया है। दरअसल कोरोनावायरस के कारण विदेशी कंपनियों की सर्विस प्रभावित हो सकती है। यह भी एक बड़ा कारण है, जिसके चलते जियो अपनी निर्भरता विदेशी कंपनियों पर घटा रही है। जियो ने 5जी तकनीक के लिए अपना हार्डवेयर डिज़ाइन किया है, जो 5जी का परीक्षण सफल होने के बाद भारत में बनाया जा सकता है।
इस मामले में दुनिया की पहली कंपनी
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम संभवत: दुनिया का पहला उदारहण है, जहां एक मोबाइल फोन कंपनी ने थर्ड पार्टी उपकरण वेंडर को बदलने के लिए इन-हाउस तकनीक विकसित की है। रिपोर्ट के अनुसार मामले से संबंधित एक व्यक्ति ने बताया है कि जियो ने 5जी तकनीक संबंधित सब कुछ एंड-टू-एंड डेवलप किया है। बाकी वेंडर की तुलना में जियो अधिक स्केलेबल और पूरी तरह से स्वचालित हैं क्योंकि जियो के पास अपना स्वयं का क्लाउड-नैटिव प्लेटफॉर्म है।
सुरक्षा और निगरानी के लिए भी हो सकेगा इस्तेमाल
जियो के एक अधिकारी के मुताबिक जियो के एंड-टू-एंड 5जी टेक्नोलॉजी विकसित करने के बाद कंपनी इसका इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में ड्रोन, औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटलीकरण का इस्तेमाल करके सुरक्षा और निगरानी के लिए भी कर सकेगी। जियो ने दूरसंचार विभाग से अपनी तकनीक के आधार पर 5जी का परीक्षण करने की मंजूरी मांगी है। इसने हाल ही में टेक्नोलॉजी और संभावित इस्तेमाल के मामलों को समझाने के लिए दूरसंचार विभाग को एक प्रेजेंटेशन भी दी है। कंपनी के अधिकारी के अनुसार अपनी तकनीक से जियो को व्यावसायिक और फ्लेक्सिबिलिटी में मदद मिलेगी।
तकनीक के मामले में जियो बढ़ रही आगे
जियो तकनीक के मामले में लगातार आगे बढ़ रही है। जियो सक्रिय रूप से कार्बनिक और अकार्बनिक अप्रोच के मिश्रण के माध्यम से 5जी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) प्रौद्योगिकी कैपेसिटी का निर्माण कर रही है। यह कदम न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी पहला है, क्योंकि अधिकांश ऑपरेटर नेटवर्क उपकरणों के लिए टेक्नोलॉजी वेंडर पर निर्भर हैं। Rancore Technologies, जो पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी थी, का विलय जियो के साथ कर दिया गया है और एक और कंपनी Radisys के अधिग्रहण से इसकी 5जी और आईओटी प्रौद्योगिकी क्षमता का निर्माण हुआ।
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