नयी दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल दोबारा ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करती दिख रही है। कंपनी के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में बीएसएनएल के नेटवर्क से जुड़ने वालों की तादाद नेटवर्क छोड़ने वालों से ज्यादा है। यानी चालू वित्त वर्ष में बीएसएनएल की मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) पॉजिटिव है। इससे पहले 2018-19 में 53.64 लाख लोगों ने बीएसएनएल का नेटवर्क चुना, जबकि 28.27 लाख ने छोड़ा था। इस लिहाज से अक्टूबर 2019 तक के आँकड़ों के मुताबिक 2.04 करोड़ लोगों ने बीएसएनएल के नेटवर्क में पोर्ट-इन किया, जबकि 1.80 करोड़ लोगों ने पोर्ट-आउट किया। गौरतलब है कि 31 अगस्त 2019 तक बीएसएनएल के कुल मोबाइल कनेक्शनों की संख्या 11.64 करोड़ थी। अन्य सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल दिल्ली और मुंबई महानगरों में सेवाएँ दे रही है, जबकि शेष भारत में बीएसएनएल संचालित है। सरकार ने इन दोनों कंपनियों के विलय की भी योजना का ऐलान कर दिया है। इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि इनके विलय से तैयार होने वाली कंपनी को पूरे भारत में विस्तार करने का मौका मिलेगा।

क्या कहा दूरसंचार मंत्री ने?
राज्य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि बीएसएनएल ने सूचित किया है कि बीएसएनएल में पोर्ट किए गए ग्राहकों की संख्या बीएसएनएल के पोर्ट-आउट ग्राहकों की तुलना में अधिक है। 2019-20 (अक्टूबर, 2019 तक) के दौरान BSNL का एमएनपी सकारात्मक है। एक अलग जवाब में रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कैबिनेट ने पिछले महीने बीएसएनएल और एमटीएनए) की रिवाइवल योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे उम्मीद है कि दोनों कंपनियों में भविष्य में सुधार होगा।
सरकार ने उठाये कई कदम
बीएसएनएल में नयी जान डालने के लिए सरकार ने कई कदम उठाये हैं। इनमें एमटीएनएल के साथ विलय के अलावा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के जरिये कर्मचारियों की लागत कम करना, 4जी सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम का प्रशासनिक आवंटन, सोवरेन गारंटी बॉन्डों के जरिये डेब्ट रीस्ट्रक्चरिंग और संपत्तियों की बिकवाली के जरिये पूँजी जुटाना शामिल है। कंपनी ने कई उपायों को लागू करने का फैसला लिया है, जिसमें अलग-अलग आउटसोर्सिंग कार्यों के लिए खर्च को कम करना शामिल है। यह फैसला कंपनी की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए लिया गया है।
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