नयी दिल्ली। नवंबर में देश का मंथली जीएसटी कलेक्शन एक बार फिर 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गया। इससे पहले आर्थिक विकास में मंदी के बीच लगातार तीन महीने, अगस्त से अक्टूबर तक, जीएसटी संग्रह 1 लाख करोड़ रुपये से कम रहा था। आर्थिक सुस्ती को दूर करने के लिए सरकार द्वारा उठाये कुछ कदमों से जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी हुई है। वहीं पिछले साल नवंबर से तुलना करें तो जीएसटी कलेक्शन 97,637 करोड़ रुपये से 6% की बढ़ोतरी के साथ 1,03,492 करोड़ रुपये रहा। इससे पहले जीएसटी कलेक्शन अक्टूबर 2018 में 1,00,710 करोड़ रुपये के मुकाबले 5.3% लुढ़क कर 95,380 करोड़ रुपये रह गया था। जबकि साल दर साल आधार पर ही सितंबर में 94,442 करोड़ रुपये की तुलना में 2.7% घट कर 91,916 करोड़ रुपये रह गया था। आपको बता दें कि सितंबर में रहा 91,916 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन फरवरी 2018 के बाद किसी भी महीने में सबसे कम रहा था।

कितना रहा सेंट्रल और स्टेट जीएसटी
नवंबर में रहे 1,03,492 करोड़ रुपये के कु जीएसटी कलेक्शन में से सेंट्रल जीएसटी की मद में 19,592 करोड़ रुपये और स्टेट जीएसटी से 27,144 करोड़ रुपये आये। वहीं इंटीग्रेटेड जीएसटी के माध्यम से सरकार को 49,028 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त हुआ। इंटीग्रेटेड जीएसटी में आयात पर 20,948 करोड़ रुपये शामिल हैं। वहीं सेस के रूप में 7,727 करोड़ रुपये आये। जुलाई 2017 में लागू होने के बाद यह आठवीं बार है जब किसी एक महीने में सरकार को जीएसटी से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला हो। नवंबर से आखरी बार जुलाई 2019 में जीएसटी कलेक्शन 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा था।
तीसरा सबसे अधिक मंथली जीएसटी कलेक्शन
नवंबर में 1,03,492 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन अब तक का किसी एक महीने का तीसरा सबसे अधिक संग्रह है। इसी साल अप्रैल में 1.13 लाख करोड़ रुपये और उससे पिछले महीने मार्च में 1.06 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन रहा था। यह भी बता दें कि 30 नवंबर 2019 तक अक्टूबर तक के GSTR 3B रिटर्न की कुल संख्या, मासिक रिटर्न का सारांश, 77.83 लाख रही है। आर्थिक सुस्ती के मोर्चे पर घिरी सरकार के लिए जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी एक राहत की खबर है। यह सरकार के लिए इसलिए भी अच्छी खबर क्योंकि सरकार पर राजस्व का दबाव है, जिसके लिए सरकार पीएसयू कंपनियों में विनिवेश कर रही है।
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