Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून गुरुवार को आधिकारिक तौर पर केरल पहुंच गया, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के इसके आने का अनुमान लगाने के कुछ दिनों बाद हुआ। इसके आने में इसकी सामान्य तारीख के मुकाबले लगभग तीन दिन की देरी हुई। मौसम विभाग ने अगले तीन घंटों के लिए अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। विभाग ने यह भी बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के साथ-साथ गरज-चमक और 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से सतही हवाएं चलने की संभावना है।

केरल में दस्तक देने के बाद, मानसून आमतौर पर अलग-अलग चरणों में उत्तर की ओर बढ़ता है, और जुलाई के मध्य तक देश के ज्यादातर हिस्सों को कवर कर लेता है। इसके आने पर बारीकी से नजर रखी जाती है, क्योंकि भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए इसका बहुत महत्व है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, देश की लगभग 51% खेती योग्य जमीन बारिश पर निर्भर है, जिससे कुल कृषि उत्पादन का लगभग 40% हिस्सा आता है। भारत की लगभग आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है, इसलिए ग्रामीण आय और समग्र आर्थिक गतिविधियों के लिए एक अच्छा मॉनसून का मौसम बेहद जरूरी माना जाता है।
इससे पहले, IMD ने कहा था कि मानसून के अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और आस-पास के इलाकों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हो रहे हैं।
कब किस राज्य में पहुंचेगा मानसून?
अगले 2 से 3 दिनों में मॉनसून पूरे गोवा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों के अलावा पूर्वोतर के राज्यों में आगे बढ़ सकता है। इस बार मॉनसून तीन दिन लेट आई है। आमतौर पर यह 1 जून को केरलम में पहुंचता है। इसके बाद 1 से 1.5 महीने में पूरे देस में फैल जाता है। 17 सितंबर के आसपास राजस्थान के रास्ते शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरा हो जाता है।
केरल में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम एजेंसी ने अगले कुछ दिनों तक केरल के कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान भी लगाया है, जबकि तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान आने की भी संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों ने मॉनसून में देरी की वजह पश्चिमी प्रशांत महासागर में बन रहे एक टाइफून को बताया था, जिसने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींच ली थी। साथ ही लक्षद्वीप के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बन गया था। माना जाता है कि इन वजहों से मॉनसून की रफ्तार धीमी हो गई और केरल में इसकी शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ गई।
जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की 80% संभावना
भारत में अल नीनो का संबंध कमजोर मॉनसून और ज्यादा गर्मी से होता है। मौसम एजेंसी की ताजा जानकारी के मुताबिक, जो अल नीनो अभी बन रहा है, वह मध्यम दर्जे का होगा और काफी तेज भी हो सकता है। यह एक ऐसी संभावना है जो भारत के लिए चिंता की घंटी बजा देगी, क्योंकि भारत पहले से ही कमजोर मानसून की आशंका का सामना कर रहा है। एजेंसी ने कहा कि अल नीनो के हालात कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभावना "90% के आस-पास या उससे ज्यादा" है।


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