नयी दिल्ली। यस बैंक पर मचे हाहाकार के बीच देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की तरफ से एक महत्वपूर्ण बयान आया है। एसबीआई ने कहा है कि यस बैंक इंडिया को बचाने के लिए प्रस्ताव योजना पर आरबीआई को जवाब देने के लिए सोमवार तक का समय है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि बैंक की लीगल टीम आरबीआई द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट योजना पर काम कर रही है ताकि यस बैंक की स्थिति में सुधार किया जा सके। उन्होंने साथ ही कहा है कि यस बैंक में जमा लोगों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। देश के पांचवे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक में एसबीआई 2450-2500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। राणा कपूर द्वारा प्रमोटेड यस बैंक के बोर्ड को अपदस्थ करने के एक दिन बाद आरबीआई ने यस बैंक के खाताधारकों के लिए 50,000 रुपये की निकासी (विशेष परिस्थिति में 5 लाख रुपये) सीमा तय कर दी है।
आरबीआई ने पेश की विशेष योजना
आरबीआई ने शुक्रवार को यस बैंक के लिए "ड्राफ्ट पुनर्निर्माण योजना" पेश की है, जिसके तहत एसबीआई 2,500 करोड़ रुपये के निवेश से संकटग्रस्त यस बैंक की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगा। एसबीआई के चेयरमैन ने कहा है कि एसबीआई आरबीआई की डेडलाइन से पहले रेजोल्यूशन योजना लागू करने की कोशिश करेगा। यस बैंक में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कम से 2,400 करोड़ रुपये की निवेश राशि की जरूरत होगी। कुमार ने बताया कि 23 संभावित निवेशकों ने निवेश योजना को देखने के बाद एसबीआई से संपर्क किया है।
26 या 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगा
एसबीआई यस बैंक में 26 या 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकता है। यह कितना निवेश शामिल है इस बार पर निर्भर है। एसबीआई उन निवेशकों के प्रस्ताव पर भी गौर कर रहा है, जिन्होंने यस बैंक में हिस्सेदारी खरीदने को लेकर रुचि दिखाई है। आरबीआई की तरफ से पेश की गयी योजना में यस बैंक की अधिकृत पूंजी को 800 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 5,000 करोड़ रुपये करना भी शामिल है। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई ने यस बैंक के एसबीआई के साथ विलय न करने का फैसला किया है क्योंकि इससे एसबीआई की बैलेंस शीट पर दबाव पड़ेगा।
2 रुपये प्रति शेयर पर बिक्री
इससे पहले खबर आयी थी कि एसबीआई और सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी यस बैंक की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने जा रहे हैं। दोनों सरकारी फर्म मिल कर यस बैंक की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि इस बात की संभावना है कि एसबीआई को ओपन ऑफर से छूट दी जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि नवंबर 2019 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मामले में भी एसबीआई को इसी तरह की छूट दी गयी थी।
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