नई दिल्ली। कर्ज की ईएमआई पर दी गई राहत यानी लोन मोरेटोरियम को सरकार बढ़ा सकती है। वित्त मंत्री ने ऐसा संकेत फिक्की के एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में लोन रिस्ट्रक्चरिंग की जरूरत है। उन्होंने बताया कि आरबीआई से लोन मोरटोरियम बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। इस पर जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार कोरोना के संकट से लोगों को राहत देने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि ईएमआई पर दी गई राहत की सुविधा आगे बढ़ाया जा सकता है। वे फिक्की के कार्यक्रम में बोल रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोन मोरेटोरियम को लेकर आरबीआई के साथ बातचीत चल रही है।

मार्च से लागू हुआ था लोन मोरेटोरियम
कोरोना वायरस की दिक्कतों के बाद लागू लॉकडाउन के बाद आर्थिक असर को देखते हुए आरबीआई ने मार्च में 3 महीने के लिए मोरेटोरियम (लोन के भुगतान में मोहलत) सुविधा दी थी। यह सुविधा मार्च से 31 मई तक 3 महीने के लिए लागू की गई थी। बाद में आरबीआई ने इसे 3 महीनों के लिए और बढ़ाते हुए 31 अगस्त तक के लिए लागू कर दिया था। इस प्रकार लोगों को कुल मिलाकर 6 महीने के लिए लोन मोराटोरियम सुविधा मिली हुई है।
रेटिंग एजेंसियों ने दी चेतावनी
वहीं ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) ने लोन मोरेटोरियम से एनपीए बढ़ने का अनुमान जताया है। एसएंडपी का कहना है कि वित्त वर्ष 2021 में भारतीय बैंकों का एनपीए बढ़कर 14 फीसदी तक जा सकता है। वित्त वर्ष 2020 में एनपीए 8.5 फीसदी था। रेटिंग एजेंसी ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय बैंकिंग सेक्टर की रिकवरी सालों पीछे चली जाएगी, इससे क्रेडिट फ्लो और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे।
जानिए आरबीआई की राय
वहीं रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास भी कई बार भरोसा दिला चुके हैं कि कोरोना से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हर संभव उठाने को केंद्रीय बैंक तैयार है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोराटोरियम नहीं बढ़ाने की स्थिति में लोन डिफॉल्ट का संकट बढ़ सकता है, क्योंकि कारोबार से लेकर नौकरीपेशा तक सबकी कमाई पर असर पड़ा है।
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