KOSPI Crash Today:दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। 26 जून को बाजार खुलते ही प्रमुख इंडेक्स कोस्पी में तेज बिकवाली शुरू हो गई और कुछ ही देर में यह करीब 8 फीसदी से ज्यादा टूट गया। हालात इतने बिगड़ गए कि एक्सचेंज को सर्किट ब्रेकर लगाकर करीब 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।

इससे पहले 23 जून को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था, जब भारी बिकवाली के कारण कारोबार रोकना पड़ा था। ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने के बाद भी बिकवाली नहीं थमी और कोस्पी करीब 10 फीसदी तक लुढ़क गया। लगातार दूसरी बार इतनी बड़ी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
आज की शुरुआत भी कमजोर रही। बाजार खुलते ही कोस्पी इंडेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ खुला, लेकिन शुरुआती कमजोरी कुछ ही मिनटों में भारी बिकवाली में बदल गई। कोरिया के स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 1 बजे इंडेक्स 8,126 के आसपास पहुंच गया, जो पिछले कारोबारी सत्र की क्लोजिंग से करीब 800 अंक नीचे था। यानी बाजार में करीब 9 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस वजह से निवेशकों में घबराहट बढ़ी और एक्सचेंज को सर्किट ब्रेकर लगाकर ट्रेडिंग रोकनी पड़ी।
अगर इस गिरावट की वजह की बात करें तो सबसे बड़ा दबाव चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में देखने को मिला। Samsung Electronics और SK Hynix जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 10-10 फीसदी से ज्यादा टूट गए। बाजार खुलने के कुछ ही घंटों में विदेशी निवेशकों ने करीब 1.7 अरब डॉलर के शेयर बेच दिए, जिससे बिकवाली और तेज हो गई। इस सप्ताह की शुरुआत में भी सेमीकंडक्टर सेक्टर में आई कमजोरी ने बाजार का सेंटिमेंट खराब किया था।
हालांकि 25 जून को Micron Technology ने बेहतर आउटलुक दिया था, जिससे कुछ समय के लिए निवेशकों का भरोसा लौटा था, लेकिन यह ज्यादा देर टिक नहीं पाया। वहीं दूसरी ओर खबरें आईं कि Apple ने मेमोरी चिप्स की कमी के कारण अपने कुछ प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई हैं। इसके साथ ही OpenAI के IPO के अगले साल तक टलने की चर्चाओं ने भी टेक सेक्टर के सेंटिमेंट पर असर डाला।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ेगा? फिलहाल भारतीय बाजार बंद है, इसलिए इसका तत्काल असर देखने को नहीं मिलेगा। लेकिन अगर आने वाले दिनों में कोरियन बाजार में इसी तरह की कमजोरी बनी रहती है, तो उसका असर वैश्विक निवेशकों के सेंटिमेंट के जरिए भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कोस्पी गिरा है तो निफ्टी और सेंसेक्स भी उसी तरह टूट जाएंगे। भारत और दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था, बाजार की संरचना और निवेशकों का व्यवहार अलग है। भारत की ग्रोथ घरेलू मांग, मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और लगातार बढ़ते निवेश पर आधारित है। यही वजह है कि कुछ समय पहले जब भारतीय बाजार दबाव में था, तब कोस्पी रिकॉर्ड तेजी दिखा रहा था। इसलिए दोनों बाजार हमेशा एक जैसी दिशा में नहीं चलते।
फिर भी अगर कोरिया की गिरावट के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चिंता, वैश्विक मंदी का खतरा, विदेशी निवेशकों की बिकवाली या भू-राजनीतिक तनाव जैसे बड़े कारण हैं, तो उसका असर दुनिया के दूसरे बाजारों के साथ भारत पर भी पड़ सकता है। खासकर आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर में निवेशकों का रुख थोड़ा सतर्क हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी होगा।
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