Stock Market : इन बातों पर निर्भर रहेगी चाल, जानिए पहले ही

मुंबई। घरेलू शेयर बाजार को इस सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक समीक्षा बैठक के नतीजे और प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे समेत कई अन्य कारकों से दिशा मिलेगी। खासतौर से सप्ताह के दौरान जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का निवेशकों को इंतजार रहेगा। इसके अलावा, मानसून की प्रगति, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कमत समेत कोरोनावायरस संक्रमण की रिपोर्ट से बाजार की चाल प्रभावित होगी।

Share Market

आरबीई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक चार अगस्त से शुरू होने जा रही है और छह अगस्त यानी गुरुवार को बैठक के नतीजे आने वाले हैं जिसका बाजार को इंतजार रहेगा। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा, सिपला, ल्युपिन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन समेत कंई कंपनियां चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के अपने वित्तीय नतीजे जारी करेंगी। इसके अलावा कई ऑटो कंपनियों की बिक्री के जुलाई महीने के आंकड़े एक अगस्त से ही आने लगे हैं जिनका असर बाजार पर सप्ताह के आरंभ से ही देखने को मिलेंगे।

देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से संबंधित जुलाई महीने के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) इस सप्ताह जारी होंगे, जिससे लॉकडाउन में ढील में पटरी पर लौटती आर्थिक गतिविधियों का हाल जानने को मिलेगा। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम और ल्युपिन के चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे गुरुवार को जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा और सिपला के वित्तीय नतीजे शुक्रवार को जारी होंगे।

मानसून की प्रगति पर भी बाजार की नजर होगी क्योंकि मानसून सीजन के पहले दो महीने के दौरान जून में जहां देशभर में औसत से 17 फीसदी ज्यादा बारिश हुई वहां जुलाई में औसत से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। बेहतर मानसून के अनुमानों से बंपर फसल की उम्मीद की जारी है। लिहाजा आगे मानसून की प्रगति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

उधर, कोरोनावायरस का कहर लगातार गहराता जा रहा है और नए मामलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ऐसे में कोरोना का साया बाजार पर इस सप्ताह भी बना रहेगा। हालांकि घरेलू शेयर बाजार की चाल बहुत हद तक विदेशी संकेतों पर निर्भर करेगा। इसलिए विदेशों में खासतौर से अमेरिका और चीन में जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा। घरेलू बाजार की चाल तय करने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई के निवेश के प्रति रुझानों से की अहम भूमिका होगी।

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