नयी दिल्ली। विदेशी निवेशकों ने इस साल भारत में निवेश करने में नया रिकॉर्ड बनाया है। भारत में चल रही आर्थिक मंदी को नकारते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों या एफपीआई ने भारतीय पूँजी बाजार में खूब निवेश किया। 2019 में अब तक के आँकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने भारत में 1.3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो पिछले 6 सालों में सबसे अधिक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल सेंसेक्स और निफ्टी ने नये रिकॉर्ड बनाये। इसके पीछे मुख्य कारण रहा एफपीआई द्वारा किया गया निवेश। एफपीआई द्वारा किये गये निवेश के चलते ही भारतीय शेयर बाजार नयी ऊँचाई तक पहुँचा। 2019 में भारत में एफपीआई की तरफ से 1.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश में से 97,250 करोड़ रुपये की भारी भरकम पूँजी इक्विटी बाजार में ही आयी। इस दौरान में एफपीआइ ने भारतीय डेब्ट बाजार में 27,000 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि बाकी 9,000 करोड़ रुपये हाइब्रिड उपकरणों में आये।

2020 में भी बरकरार रह सकता ये ट्रेंड
विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 में भी यह सकारात्मक रुख जारी रह सकता है। हालाँकि यूएस-चीन व्यापार युद्ध और घरेलू ऋण बाजार की स्थिति बिगड़ने से हालात उल्टे हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक अनुकूल वैश्विक ब्याज दर, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार फंड इन्फ्यूजन और घरेलू कॉर्पोरेट की आमदनी में अपेक्षित बढ़ोतरी की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक संभावनाएँ हैं।
कैसी रही खरीदारी-बिकवाली
आपको बता दें कि डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 18 लाख करोड़ रुपये की सकल खरीद यानी ग्रॉस परचेज की है। वहीं अब तक विदेशी निवेशकों ने 16.7 लाख करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की बिकवाली की। इन प्रतिभूतियों में इक्विटी शेयर, डेब्ट और हाइब्रिड इंस्ट्रुमेंट शामिल हैं। इस लिहाज से 1.3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। 18 लाख करोड़ रुपये का इन्फ्लो यानी ग्रॉस पर्चेज पिछले 5 सालों में सबसे अधिक है। पिछले साल एफपीआई ने 81000 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।
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