नयी दिल्ली। जल्द ही सरकार पेट्रोल में कुछ मिलाने जा रही है। चौंकिये मत इससे आपके वाहन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल सरकार देश भर में मेथेनॉल मिश्रित ईंधन पेश करने पर विचार कर रही है। यानी अब आपको जल्दी ही मेथेनॉल मिश्रित डीजल और पेट्रोल मिलेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिख कर कहा है कि वे इस ईंधन की स्टेशनों पर व्यावसायिक बिक्री के लिए सभी तरह के प्रयास करें। इस समय देश में करीब 10 फीसदी वाहनों में इथेनॉल मिश्रित वाहन हैं। लेकिन इथेनॉल उत्पादन की लागत तुलनात्मक रूप से 42 रुपये प्रति लीटर पर काफी अधिक है। मेथेनॉल या मेथिल अल्कोहल की कीमत 20 रुपये प्रति लीटर से कम होने का अनुमान है। कम कीमत के अलावा मेथेनॉल मिश्रित डीजल और पेट्रोल के कई फायदे हैं।
क्या होंगे मेथेनॉल मिश्रित ईंधन के फायदे
मेथेनॉल मिश्रित ईंधन के कई फायदे हैं। सबसे पहले तो प्रदूषण में कमी आयेगी। इस ईंधन से गाड़ियों के प्रदूषण में 30 तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा सरकार के तेल आयात बिल में 10 फीसदी की कमी आ सकती है। यानी सरकार अपने वार्षिक तेल आयात बिल पर 5000 करोड़ रुपये की बचत कर सकेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। भारत अपनी तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
इंडियन ऑयल पहले से कर रही उत्पादन
देश की प्रमुख तेल कंपनी इंडियन ऑयल पहले से ही इस ईंधन का उत्पादन कर रही है। इंडियन ऑयल M15 blended fuel का उत्पादन कर रही है, जिसमें 15 फीसदी मेथेनॉल और 85 फीसदी पेट्रोल होता है। इंडियन ऑयल का यह ईंधन कमर्शियल इस्तेमाल के लिए भी उपलब्ध है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक नीति आयोग के सदस्य के अनुसार 65000 किलोमीटर का ट्रायल भी हो चुका है। अगर देश में इस ईंधन का इस्तेमाल यातायात और खाने पकाने में होने लगे तो एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक देश के कच्चे तेल के आयात में 100 बिलियन डॉलर की कमी आ सकती है।
इतना तेल मंगाता है भारत
भारत का दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश का वार्षिक तेल आयात बिल 5 लाख करोड़ रुपये रहता है, जबकि 2900 करोड़ लीटर पेट्रोल और 9000 करोड़ लीटर खपत होती है। वर्तमान में मेथेनॉल असम पेट्रोकेमिकल्स में तैयार किया जा रहा है, जहां वर्तमान उत्पादन क्षमता 100 टन प्रतिदिन है। कंपनी को अप्रैल 2020 तक ये उत्पादन 6 गुना यानी 600 टन प्रतिदिन तक बढ़ाने की उम्मीद है।
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